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Thursday, 12 March, 2026
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भारत होर्मुज से अपने व्यापारिक जहाजों के सुरक्षित मार्ग के लिए ईरान के संपर्क में

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नयी दिल्ली, 12 मार्च (भाषा) भारत होर्मुज जलडमरूमध्य के रणनीतिक जहाजरानी मार्ग से भारतीय ध्वज वाले लगभग 28 व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने को लेकर ईरान के साथ संपर्क में है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

अमेरिका और इजराइल के साथ संघर्ष के बीच ईरान ने इस मार्ग को आंशिक रूप से अवरुद्ध कर दिया है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, मंगलवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष के बीच हुई बातचीत के दौरान जहाजरानी की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा से संबंधित मुद्दे उठे थे।

पता चला है कि ईरान ने पिछले चार-पांच दिन में भारतीय ध्वज वाले किसी भी वाणिज्यिक टैंकर को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति नहीं दी है।

पोत परिवहन मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, वर्तमान में होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में भारतीय ध्वज वाले कुल 24 जहाज 677 भारतीय नाविकों के साथ मौजूद हैं, जबकि रणनीतिक जलमार्ग के पूर्व में 101 भारतीय नाविकों वाले चार जहाज तैनात हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अपनी साप्ताहिक प्रेस वार्ता में कहा, ‘‘हाल के दिनों में विदेश मंत्री और ईरान के विदेश मंत्री के बीच तीन बार बातचीत हुई है। आखिरी वार्ता में जहाजरानी की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर चर्चा हुई। इससे आगे कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।’’

ईरान द्वारा फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक संकरे समुद्री परिवहन मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग अवरुद्ध कर दिए जाने के बाद वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में उछाल आया है।

जायसवाल ने कहा कि लगभग 9,000 भारतीय इस समय ईरान में रह रहे हैं और भारत सरकार उन लोगों की मदद कर रही है जो अजरबैजान और आर्मेनिया होते हुए भारत लौटना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘इन 9,000 भारतीय नागरिकों में छात्र, नाविक, कुछ व्यवसायी, कुछ पेशेवर और कुछ तीर्थयात्री शामिल हैं।’’

भारत पहले ही छात्रों और तीर्थयात्रियों सहित कई भारतीय नागरिकों को तेहरान से ईरान के अन्य सुरक्षित स्थानों और शहरों में स्थानांतरित कर चुका है।

जायसवाल ने कहा, ‘‘हम उन भारतीय नागरिकों की भी सहायता कर रहे हैं जो अजरबैजान और आर्मेनिया जाने चाहते हैं और वहां से वाणिज्यिक उड़ानों से घर लौटना चाहते हैं। हम उन्हें वीजा और जमीनी सीमा पार करने में सहायता कर रहे हैं।’

भाषा आशीष देवेंद्र

देवेंद्र

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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