नयी दिल्ली, 27 फरवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि भारत ने पिछले 12 वर्षों में अपनी अंतर्निहित शक्ति को पहचाना है और इस बढ़ते आत्मविश्वास की वजह से विकसित देश भी व्यापार समझौते के लिए आगे आ रहे हैं।
मोदी ने ‘न्यूज-18 राइजिंग भारत सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए कहा कि आजादी के बाद भी कुछ लोगों ने अपने फायदे के लिए औपनिवेशिक मानसिकता को बरकरार रखा।
उन्होंने कहा, ‘‘यदि हमने अपनी अंतर्निहित शक्ति को पहचान कर अपने संस्थानों को मजबूत न किया होता, तो कोई भी देश हमारे साथ व्यापार समझौते नहीं करता। इसी कारण विकसित देश भारत के साथ व्यापार समझौते करने के लिए आगे आए हैं।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी देश में क्षमता अचानक नहीं आती बल्कि यह पीढ़ियों से निर्मित होती है, और ज्ञान, परंपरा, कड़ी मेहनत और अनुभव द्वारा निखरती है।
मोदी ने कहा कि इतिहास के लंबे कालखंड में, सदियों की गुलामी ने देश की क्षमता के प्रति हीनता की भावना को भर दिया था, और अन्य देशों से आयातित विचारधारा ने समाज में इस धारणा को गहराई से बैठा दिया था कि भारतीय अशिक्षित और अधीन हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर देश अब भी 2014 से पहले के युग की निराशा में डूबा हुआ होता, ‘कमजोर पांच’ देशों में गिना जाता और नीतिगत गतिरोध से ग्रस्त होता, तो हमारे साथ व्यापार समझौता कौन करता?’’
मोदी ने कहा, ‘‘पिछले 11 वर्षों में, देश की चेतना में ऊर्जा का एक नया प्रवाह प्रवाहित हुआ है। भारत अब अपनी खोई हुई क्षमता को पुनः प्राप्त करने का प्रयास कर रहा है।’’
भाषा धीरज रंजन
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