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Tuesday, 28 April, 2026
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भारत को एस-400 मिसाइल प्रणाली की चौथी इकाई अगले महीने की शुरुआत में प्राप्त होने की उम्मीद

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नयी दिल्ली, 28 अप्रैल (भाषा) भारत को सतह से हवा में मार करने वाली एस-400 ट्रायम्फ मिसाइल प्रणाली की चौथी इकाई रूस से अगले महीने के पहले हिस्से में प्राप्त होने की उम्मीद है। इससे भारतीय वायुसेना के वायु रक्षा तंत्र को और मजबूती मिलेगी। सुरक्षा प्रतिष्ठान के सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

अक्टूबर 2018 में, भारत ने पांच मिसाइल प्रणालियां खरीदने के लिए रूस के साथ 5 अरब अमेरिकी डॉलर का एक समझौता किया था और इनमें से तीन की आपूर्ति पहले ही की जा चुकी है।

सूत्रों ने बताया कि मिसाइल प्रणाली की आपूर्ति के लिए संशोधित समय-सीमा के अनुसार, पांचवीं इकाई नवंबर तक सुपुर्द कर दी जाएगी।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एस-400 मिसाइल प्रणालियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी।

पिछले महीने, नयी दिल्ली ने रूस से पांच एस-400 मिसाइल प्रणालियों की एक नयी खेप की खरीद को मंजूरी दी थी, जिससे इसकी कुल संख्या 10 हो जाएगी।

पता चला है कि मिसाइल प्रणाली की चौथी इकाई पहले ही रवाना की जा चुकी है और अगले कुछ दिनों में इसके भारत पहुंचने की उम्मीद है।

भारत ने एस-400 मिसाइल की खरीद के लिए सात साल पहले एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जबकि अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि अनुबंध को आगे बढ़ाने से ‘काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट’ (सीएएटीएसए) के प्रावधानों के तहत अमेरिकी प्रतिबंध लग सकते हैं।

सूत्रों ने बताया कि भारत को अमेरिकी प्रतिबंधों से किसी भी तरह की बाधा की उम्मीद नहीं है, क्योंकि यह नयी खरीद पिछले आर्डर का ‘अनुगामी’ होगा।

भारतीय वायुसेना ने 7-10 मई को पाकिस्तान के साथ हुए सैन्य संघर्ष के दौरान इन मिसाइल प्रणालियों का व्यापक रूप से उपयोग किया था।

संघर्ष के कुछ हफ्ते बाद, एस-400 मिसाइल की एक और खेप खरीदने का प्रस्ताव रखा गया था।

रूस ने भारतीय कर्मियों के एक समूह को इन मिसाइल प्रणालियों को संचालित करने का पहले ही प्रशिक्षण दिया है।

एस-400 को रूस की सबसे उन्नत लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल रक्षा प्रणाली के रूप में जाना जाता है।

भाषा अमित पवनेश

पवनेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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