नयी दिल्ली, 14 सितंबर (भाषा) विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान का सोमवार को स्वागत किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि 2029 तक सभी भाजपा-राजग शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू कर दी जाएगी। संगठन ने कहा कि यह देश में लैंगिक असमानता और भेदभाव को खत्म करने की दिशा में एक ‘‘मील का पत्थर’’ साबित होगा।
शाह ने रविवार को कहा था कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की 21 राज्यों में सरकारें 2029 से पहले समान नागरिक संहिता लागू करेंगी।
शाह ने मुंबई में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार की उपलब्धियों और भाजपा के 25 साल के सफर का जिक्र किया।
शाह ने कहा, ‘‘तीन तलाक को समाप्त कर दिया गया है, जिससे मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार मिले हैं। हमने कई राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू की है और मुझे विश्वास है कि 2029 से पहले हम भाजपा-राजग शासित सभी 21 राज्यों में इसे लागू कर देंगे।’’
अगले लोकसभा चुनाव 2029 में होने हैं।
विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि समान नागरिक संहिता बड़ी संख्या में उन महिलाओं को अपने अधिकार हासिल करने में सक्षम बनाएगी, जो पिछले 75 वर्षों से इनसे वंचित रही हैं।
बंसल ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘यह महिलाओं और बच्चों को कट्टरपंथियों तथा अलगाववादियों के चंगुल से मुक्त कराने में भी मदद करेगा।’’
उन्होंने शाह के बयान को स्वागत योग्य बताते हुए दावा किया कि यूसीसी पहले ही पांच राज्यों में लागू की जा चुकी है और तीन अन्य राज्यों में इसे लागू करने की प्रक्रिया चल रही है।
बंसल ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘2029 तक भारत के 80 प्रतिशत हिस्से में यूसीसी लागू होगी। मोदी सरकार को बधाई… यह फैसला भारत में बची हुई लैंगिक असमानता और भेदभाव को खत्म करने तथा महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।’’
बंसल ने ‘पीटीआई वीडियो’ से बातचीत में कहा, ‘‘यह एक बेहद स्वागत योग्य और महत्वपूर्ण कदम है, जिसका हर जगह समर्थन किया जाना चाहिए। यूसीसी पहले ही भाजपा शासित चार-पांच राज्यों में लागू की जा चुकी है। गोवा में यह शुरुआत से ही लागू है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘राजस्थान, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल समेत कई अन्य राज्यों में इसे लागू करने की प्रक्रिया चल रही है। मेरा मानना है कि इस साल के अंत तक इसे ज्यादातर राज्यों में लागू कर दिया जाएगा।’’
उन्होंने गैर-भाजपा शासित राज्यों से भी इस मुद्दे पर पहल करने का आग्रह किया। बंसल ने कहा, ‘‘गैर भाजपा शासित राज्यों को भी यूसीसी लागू करने पर विचार करना चाहिए। आखिरकार, नागरिकों को समान अधिकार देना, महिलाओं को अधिकार देना और बच्चों के छीने गए अधिकारों को बहाल करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। यह सिर्फ नैतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि संवैधानिक दायित्व भी है।’’
भाषा आशीष दिलीप
दिलीप
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