नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके के हाल ही में मध्य प्रदेश के बालाघाट के एक स्कूल के दौरे पर स्थानीय पत्रकारों ने सवाल उठाए और उनकी आलोचना की. यह सवाल उन आदिवासी परिवारों से उनकी देर से मुलाकात को लेकर थे, जिन्होंने बीमारी के कारण अपने बच्चों को खो दिया था.
उनके दौरे के दौरान स्थानीय मीडिया ने दिपके से उस इलाके में देर से पहुंचने को लेकर सवाल किए.
दिपके के वहां पहुंचने के बाद पत्रकारों ने उनसे पूछा, “आप अब क्यों आए हैं? क्या आप सोशल मीडिया पर नाम कमाने के लिए यहां आए हैं?”
30 आदिवासी बच्चों की मौत
इंस्टाग्राम पर कई पोस्ट और स्टोरी में दिपके ने बालाघाट के अपने दौरे और वहां आदिवासी समुदायों की स्थिति के बारे में जानकारी साझा की. दो दिन पहले उन्होंने एक रील पोस्ट की थी, जिसमें वह हाईवे पर गाड़ी चलाते हुए दिखाई दे रहे थे.
कैप्शन में लिखा था: “मैं आपको एक ऐसी जगह ले जा रहा हूं, जहां का भारत शायद आपको यकीन ही नहीं होगा कि मौजूद है.”
इसके बाद की पोस्ट में दिपके ने बालाघाट में आदिवासी बच्चों के साथ अपनी तस्वीरें शेयर कीं. इसके कैप्शन में लिखा था:
“खुशियों की तलाश! बालाघाट के बच्चों की ज़िंदगी आसान नहीं है. कल मैं एक वीडियो शेयर करूंगा, जिसमें उन कड़ी परिस्थितियों को दिखाया जाएगा, जिनका वे हर दिन सामना करते हैं. तब तक, आइए उनकी मुस्कुराहट को बस महसूस करें, जो किसी तरह इन सभी मुश्किलों के बीच भी बनी हुई है.”
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मई से अगस्त के बीच बालाघाट में 30 आदिवासी बच्चों की संक्रामक बीमारियों, जिनमें खसरा और मलेरिया शामिल हैं, के साथ-साथ कुपोषण से मौत हुई.
दिपके प्रभावित परिवारों से मिलने और इलाके में पानी के संकट और स्कूलों की स्थिति को रिकॉर्ड करने के लिए वहां गए थे. उन्होंने जिन स्कूलों में से एक का दौरा किया, वहां कक्षाओं में बेंच या दूसरी बुनियादी सुविधाएं नहीं थीं. एक कमरे के अंदर घास भी उग रही थी.
उन्होंने एक वीडियो के कैप्शन में लिखा, “क्या नेता अपने बच्चों को ऐसे स्कूलों में भेजेंगे?” उन्होंने इलाके में सप्लाई किए जा रहे पानी के रंग को दिखाने वाले वीडियो भी पोस्ट किए.
पत्रकारों ने दिपके के दौरे पर सवाल उठाए
हालांकि, दौरे के दौरान स्थानीय पत्रकारों ने दिपके से सवाल किए और उनके दौरे के समय और मकसद को लेकर सवाल उठाए.
पत्रकारों से बात करते हुए दिपके ने कहा, “प्रभावित इलाके में देर से पहुंचने के लिए मैं माफी मांगता हूं.”
इन वीडियो के वायरल होने के एक दिन बाद, सीजेपी के राष्ट्रीय संयोजक ने “मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री” के तौर पर एक मजाकिया इस्तीफा पत्र पोस्ट किया. इसमें उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव पर तंज कसा, जो अगस्त के आखिरी हफ्ते में इस इलाके का दौरा कर चुके थे.
इस व्यंग्यात्मक इस्तीफा पत्र में लिखा था, “30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की मौत के बाद मेरा जमीर मुझे इस कुर्सी पर बने रहने की इजाजत नहीं देता.”
इसमें राज्य के मुख्यमंत्री के नजरिए से प्रभावित परिवारों को समय पर इलाज और मदद नहीं दे पाने के लिए माफी भी मांगी गई थी.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)