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Friday, 26 June, 2026
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IDFC फर्स्ट बैंक घोटाला: जांच के घेरे में IAS अधिकारी प्रदीप कुमार, CBI की कार्रवाई से पहले फरार

एक्सक्लूसिव: हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में सदस्य सचिव रहते हुए IDFC फर्स्ट बैंक में जमा 169 करोड़ रुपये की सरकारी राशि की कथित हेराफेरी का मामला.

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नई दिल्ली: 590 करोड़ रुपये के IDFC बैंक घोटाले में कथित भूमिका को लेकर जांच के घेरे में आए भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी प्रदीप कुमार फरार बताए जा रहे हैं. दिप्रिंट को मिली जानकारी के अनुसार, कुमार का फोन बंद है और वह पिछले तीन दिनों से अपने घर पर नहीं हैं.

जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की एक टीम उन्हें गिरफ्तार करने के लिए उनके घर पहुंची थी, लेकिन वह वहां नहीं मिले.

प्रदीप कुमार के आवास पर किए गए फोन कॉल का भी कोई जवाब नहीं मिला.

प्रदीप कुमार इस साल 8 अप्रैल तक परिवहन विभाग में निदेशक (राज्य परिवहन) और विशेष सचिव के पद पर तैनात थे. घोटाले में कथित संलिप्तता सामने आने के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था.

यह घोटाला फरवरी में सामने आया था, जब हरियाणा के पंचायत विभाग ने अपना बैंक खाता बंद कर उसमें मौजूद राशि को किसी दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू की. इसी दौरान सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज राशि और खाते में वास्तव में मौजूद रकम के बीच बड़ा अंतर सामने आया.

शुरुआत में मामले की जांच हरियाणा विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो ने दर्ज की थी, लेकिन कथित धोखाधड़ी के बड़े पैमाने को देखते हुए बाद में जांच सीबीआई को सौंप दी गई.

अब तक इस मामले में सरकारी अधिकारियों समेत 19 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि जांच के दौरान कई अन्य अधिकारियों को निलंबित भी किया गया है.

प्रदीप कुमार कौन हैं

प्रदीप कुमार हरियाणा सिविल सेवा (HCS) से पदोन्नत होकर IAS बने 2011 बैच के अधिकारी हैं. वह 30 जून को सेवानिवृत्त होने वाले हैं, यानी उनकी रिटायरमेंट में अब सिर्फ चार दिन बचे हैं.

ढाई दशक से ज्यादा लंबे प्रशासनिक करियर में उन्होंने उप-मंडल अधिकारी (SDO), उपायुक्त (DC) और विभिन्न विभागों में निदेशक जैसे कई पदों पर काम किया. वह सिरसा और फतेहाबाद के उपायुक्त भी रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा निदेशक और पर्यावरण निदेशक की जिम्मेदारी भी संभाली.

मौजूदा जांच के लिहाज़ से उनकी सबसे महत्वपूर्ण तैनाती हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव के रूप में रही, जहां वह अगस्त 2022 से दिसंबर 2025 तक रहे.

IDFC फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ सेक्टर-32 शाखा में मौजूद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के खाते से कथित तौर पर 169 करोड़ रुपये की हेराफेरी हुई. जांच एजेंसियों का कहना है कि यह पूरे घोटाले में किसी एक विभाग का सबसे बड़ा नुकसान है. जांचकर्ताओं के अनुसार यह पैसा बैंक अधिकारियों से जुड़ी फर्जी कंपनियों (शेल एंटिटी) के जरिए निकाला गया.

सीबीआई पहले ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-A के तहत प्रदीप कुमार की भूमिका की जांच के लिए मंजूरी ले चुकी है.

वर्तमान में मुद्रण एवं स्टेशनरी विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर तैनात 1991 बैच के IAS अधिकारी विनीत गर्ग उस समय हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष थे, जब IDFC फर्स्ट बैंक में यह धन जमा किया गया था. सीबीआई ने गर्ग के खिलाफ जांच के लिए भी धारा 17-A के तहत मंजूरी ली है. इस वजह से वह इस मामले में जांच के घेरे में आने वाले सबसे वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों में शामिल हैं.

बड़ा घोटाला और गिरफ्तारियां

यह कथित घोटाला हरियाणा सरकार के आठ विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन की दो संस्थाओं तक फैला हुआ है. सीबीआई ने कुल नुकसान 657 करोड़ रुपये बताया है, जबकि धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत समानांतर जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने यह राशि 645 करोड़ रुपये आंकी है.

अब तक दो हरियाणा कैडर के आईएएस अधिकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

2012 बैच के आईएएस अधिकारी राम कुमार सिंह को 18 जून को गिरफ्तार किया गया था. उन पर पंचकूला नगर निगम के खाते से 79.46 करोड़ रुपये निकालने में भूमिका का आरोप है.

सीबीआई के अनुसार, उन्होंने फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) बनवाने के नाम पर कई हस्ताक्षरित चेक बैंक अधिकारियों को सौंप दिए थे. लेकिन कोई FD नहीं बनाई गई और पैसा कथित तौर पर फर्जी कंपनियों में भेज दिया गया.

22 जून को गिरफ्तार किए गए पंकज अग्रवाल उस समय स्कूल शिक्षा और कृषि विभाग के प्रधान सचिव थे, जब हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद और हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के खाते वित्त विभाग के दिशा-निर्देशों के खिलाफ खोल दिए गए थे. इन दोनों विभागों को मिलाकर 60.54 करोड़ रुपये के नुकसान का आरोप है.

चंडीगढ़ से जुड़े मामले में AGMUT कैडर के वरिष्ठ भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी नवनीत कुमार श्रीवास्तव को भी गिरफ्तार किया गया है. उन पर CREST (चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी) घोटाले में भूमिका का आरोप है. यह कथित घोटाला उनके CEO रहने के दौरान हुआ था.

कुल मिलाकर CBI की जांच के दायरे में आठ IAS अधिकारी हैं— विनीत गर्ग (1991 बैच), पंकज अग्रवाल (2000 बैच), मोहम्मद शायिन (2002 बैच), साकेत कुमार (2005 बैच), डी.के. बेहरा (2007 बैच), मणि राम शर्मा (2009 बैच), प्रदीप कुमार (2011 बैच) और राम कुमार सिंह (2012 बैच).

इनमें से पंकज अग्रवाल और राम कुमार सिंह को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि प्रदीप कुमार फिलहाल लापता बताए जा रहे हैं.

सीबीआई ने हरियाणा से जुड़े मामले में अब तक 17 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. इनमें IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के छह अधिकारी, तीन सरकारी कर्मचारी, दो कंपनियां और छह निजी व्यक्ति शामिल हैं. IAS अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट अभी दाखिल नहीं की गई है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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