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Friday, 10 April, 2026
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बदलते राजनीतिक परिदृश्य को समझने के लिए हुमायूं कबीर से मुलाकात की थी: सलीम

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(सौगत मुखोपाध्याय)

कोलकाता, चार अप्रैल (भाषा) हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के साथ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की संक्षिप्त वार्ता को लेकर उठे सवालों के बीच माकपा ने स्पष्ट किया है कि यह कवायद केवल राज्य के बदलते राजनीतिक परिदृश्य को समझने और व्यापक विपक्षी एकता की संभावनाएं तलाशने के लिए की गई थी।

माकपा की पश्चिम बंगाल इकाई के सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ समान विचारधारा वाले दलों को साथ लाने के उद्देश्य से विभिन्न दलों से संवाद किया जा रहा था।

सलीम ने कहा, हालांकि ‘‘हर तरह की सांप्रदायिक राजनीति’’ के खिलाफ माकपा के रुख स्पष्ट करने और चर्चा में आगे बढ़ने के लिए शर्त रखने के बाद कबीर की पार्टी के साथ सीट-बंटवारे पर बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी।

मुर्शिदाबाद के भरतपुर से विधायक हुमायूं कबीर को तृणमूल कांग्रेस ने पिछले वर्ष दिसंबर में पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। यह कार्रवाई बेलडांगा में बाबरी ढांचे की तर्ज पर मस्जिद निर्माण की उनकी पहल के बाद की गई। कबीर पहले कांग्रेस और भाजपा में भी रह चुके हैं।

कोलकाता के एक होटल में 28 जनवरी को सलीम और कबीर की मुलाकात ने पश्चिम बंगाल की सियासत में हलचल मचा दी थी।

सलीम ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा, “पिछले दो वर्षों से हम धुर-वामपंथी गुटों के साथ-साथ कई सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक संगठनों से लगातार बातचीत कर रहे थे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अगर मकसद बंगाल को फासीवादी और निरंकुश ताकतों से बचाना है, तो यहां मौजूद और उभरती राजनीतिक धाराओं व सोच की बारीकियों को समझना होगा तथा सबसे व्यापक एकता की तलाश करनी होगी।’’

एक अप्रैल को वाम मोर्चा के अध्यक्ष बिमान बोस ने घोषणा की थी कि गठबंधन 252 विधानसभा सीट पर सीधे चुनाव लड़ेगा, जबकि 42 सीट पर सहयोगी दलों को समर्थन दिया जाएगा। इन सहयोगी दलों में इंडियन सेकुलर फ्रंट (आईएसएफ) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन शामिल हैं।

सलीम ने स्पष्ट किया, ‘‘कबीर के साथ बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी, क्योंकि हमारे बीच मतभेद इतने गहरे थे कि उन्हें पाटना संभव नहीं था। हमारी कोशिश उन्हें यह समझाने की थी कि बंगाल की जनता जिस विकल्प की तलाश में है, उसमें सांप्रदायिक राजनीति कोई भूमिका नहीं निभा सकती।”

सलीम ने कहा, “हमने कबीर से साफ कहा था कि कांग्रेस, भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के नेता के रूप में उन्होंने अतीत में जो भी किया, उसे नजरअंदाज किया जा सकता है, लेकिन वाम गठबंधन का हिस्सा बनने से पहले उन्हें जनता से माफी मांगनी होगी।”

उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, “एआईएमआईएम जैसी पार्टियों के साथ किसी भी तरह का गठबंधन वामपंथ के लिए स्वीकार्य नहीं है। यह संवाद इसलिए जरूरी था, ताकि हम अपना रुख स्पष्ट कर सकें।”

चुनाव से पहले गठबंधन बनाने को लेकर वामपंथ की स्थिति कमजोर होने की धारणाओं को खारिज करते हुए सलीम ने कहा कि इस बार चुनावी समझौते कई वर्षों में पहली बार “बेहद सुचारू ढंग से” पूरे किए गए हैं।

सलीम ने कहा कि पार्टी ने इस बार अनुभवी, युवा और मध्यम आयु वर्ग के उम्मीदवारों का संतुलित मिश्रण उतारने की रणनीति अपनाई है, जिसमें प्रत्येक जिले में एक से अधिक वरिष्ठ उम्मीदवार नहीं होंगे।

भाषा खारी शफीक

शफीक

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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