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Saturday, 8 August, 2026
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एंट्री लॉग, CCTV फुटेज, WhatsApp चैट—CBI ने NEET-UG 2026 पेपर लीक की गुत्थी कैसे सुलझाई

NEET-UG 2026 पेपर लीक और NTA सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स की भूमिका की CBI जांच में MyGate एंट्री लॉग्स, CCTV फुटेज और WhatsApp चैट्स अहम सबूत के तौर पर सामने आए हैं.

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नई दिल्ली: NEET-UG 2026 के लीक हुए प्रश्नपत्रों से फायदा उठाने वाले लोगों तक पहुंचने की कोशिश में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) पुणे में एक कारोबारी महिला के घर तक पहुंची. आरोपी मनीषा वाघमारे ने कथित तौर पर लीक हुए प्रश्नपत्र पुणे के ही एक अन्य व्यक्ति धनंजय लोखंडे को दिए थे. यह कदम उन घटनाओं की कड़ी की पहली कड़ी साबित हुआ, जिसने NEET के प्रश्नपत्र लीक मामले को पूरे देश में बड़ा घोटाला बना दिया.

अपनी चार्जशीट में CBI ने वाघमारे को “मुख्य मददगार और साजिशकर्ता” बताया है, क्योंकि वह प्रश्नपत्र लीक होने के स्रोत और उसके आगे फैलाए जाने के बीच की कड़ी थी.

जैसा कि ThePrint ने पहले बताया था, CBI को पता चला कि वाघमारे ‘NEET 2026’ नाम से एक WhatsApp ग्रुप चला रही थी. इस ग्रुप में दो छात्र और पीवी कुलकर्णी नाम का एक प्रोफेसर शामिल था. उसके नाम का मिलान NTA के विशेषज्ञों की सूची से करने पर एजेंसी को पुख्ता सबूत मिले कि कुलकर्णी, जो NTA के Chemistry पैनल में था और अनुवाद की प्रक्रिया में भी शामिल था, प्रश्नपत्र लीक होने के मुख्य स्रोतों में से एक था.

एजेंसी को पता चला कि कुलकर्णी ने अपने घर पर विशेष कक्षाएं लगाईं. इन कक्षाओं में नौ छात्र शामिल हुए थे. इनमें WhatsApp ग्रुप के दो सदस्य भी थे. ये कक्षाएं 25 अप्रैल से 27 अप्रैल 2026 तक चलीं और इनका मकसद NEET UG 2026 परीक्षा के प्रश्न उपलब्ध कराना था. इन कक्षाओं में शामिल हुए छात्रों द्वारा बताई गई जानकारी की पुष्टि MyGate एप्लिकेशन के लॉग से हुई. इन लॉग में ‘NEET 2026’ और ‘फीफा विश्व कप 2026’ WhatsApp ग्रुप के सदस्यों की एंट्री दिखाई दी. दूसरे ग्रुप में NEET के छह और उम्मीदवार थे.

CBI का कहना है कि जिन छात्रों में से एक की एंट्री MyGate एप्लिकेशन में दर्ज थी, उसकी मां ने परीक्षा के बाद कुलकर्णी का पता मांगा था, ताकि उसे उपहार के तौर पर एक घड़ी भेजी जा सके. इससे प्रश्नपत्र लीक होने से पहले हुई घटनाओं की पूरी कड़ी की पुष्टि करने वाला मजबूत परिस्थितिजन्य सबूत मिला.

वाघमारे के फोन की जांच से कुलकर्णी की भूमिका सामने आने के बाद, एजेंसी की जांच और उन दो छात्रों तथा उनके माता-पिता से पूछताछ में NTA की एक और विषय विशेषज्ञ मनीषा मंधारे का नाम सामने आया. वह NTA के Biology पैनल में थी.

CBI को पता चला कि दोनों WhatsApp ग्रुप में मौजूद सभी आठ छात्रों ने बोटेनी (वनस्पति विज्ञान) की प्रोफेसर मनीषा मंधारे (A-1) के घर पर कक्षाएं की थीं. मंधारे ने छात्रों को अपनी नई XI और XII NCERT किताबों में कुछ खास पैराग्राफ पर निशान लगाने को कहा था और साथ ही किताबों के किनारों पर लिखने के लिए प्रश्न भी बोलकर लिखवाए थे.

कुलकर्णी, मंधारे और वाघमारे की तीनों की जोड़ी को CBI ने इस साल 16 मई को गिरफ्तार किया. यह CBI के मामले की जांच अपने हाथ में लेने के सिर्फ चार दिन बाद हुआ.

केमिस्ट्री और बायोलॉजी के बाद फिजिक्स

16 मई तक CBI ने पुष्टि कर ली थी कि NTA के पैनल में शामिल दो विशेषज्ञ प्रश्नपत्र लीक होने के स्रोत थे और वाघमारे के जरिए प्रश्न राजस्थान के सीकर तक पहुंच गए थे. तब तक एजेंसी दिनेश बिवाल, मांगीलाल बिवाल और उनके बेटे विकास बिवाल को लीक हुए प्रश्नपत्र हासिल करने के आरोप में गिरफ्तार कर चुकी थी.

एजेंसी ने गुरुग्राम के करियर काउंसलर यश यादव को भी गिरफ्तार किया था. उस पर शुबम खैरनार से प्रश्नपत्र लीक कराने में मदद करने का आरोप था. शुबम खैरनार को कथित तौर पर पुणे के धनंजय लोखंडे से लीक हुए प्रश्नों की असली कागजी प्रतियां मिली थीं.

हालांकि, मंधारे की गिरफ्तारी के बाद उसके फोन की आगे की जांच में 25 अप्रैल को उसके WhatsApp चैट में 60 हाथ से लिखे हुए फिजिक्स के सवाल मिले. ये प्रश्न मनीषा संजय हवलदार नाम की एक महिला के साथ चैट में थे. उसका नाम भी NEET UG 2026 से जुड़े विषय विशेषज्ञों की सूची में था.

“इससे पता चला कि फिजिक्स के प्रश्न भी लीक हुए थे,” एजेंसी ने चार्जशीट में दर्ज किया है. इसके अलावा, मंधारे के फोन में अलग लिखावट में 66 फिजिक्स के प्रश्न भी मिले. ये प्रश्न हवलदार के पति के नंबर से भेजे गए थे.

मनीषा हवलदार को इस साल 22 मई को गिरफ्तार किया गया.

एजेंसी ने चार्जशीट में आरोप लगाया कि 66 फिजिक्स प्रश्नों का जो लीक हुआ सेट था, उसे पुणे के एक PMA कोचिंग संस्थान में पढ़ाने वाले तेजस शाह ने लिखा था.

एजेंसी के अनुसार, शाह को APMA कोचिंग संस्थान की डायरेक्टर हिमानी सचिन तपस्वी ने हवलदार के पास भेजा था. उसे निर्देश दिया गया था कि वह खुद को सुजाता कले से जुड़ा हुआ बताए. CBI ने सुजाता काले को “NTA से जुड़ी सीनियर केमिस्ट्री फैकल्टी मेंबर” बताया है.

CBI के अनुसार, 14 अप्रैल को हुई उनकी मुलाकात के दौरान हवलदार ने शाह को 68 प्रश्न बोलकर लिखवाए. शाह ने उन्हें 16 पन्नों पर लिखा. इसके बाद उसने 25 अप्रैल की रात WhatsApp के जरिए अपने हाथ से लिखे हुए नोट्स हवलदार के पति को भेजे. फिर ये नोट्स 26 अप्रैल की सुबह मंधारे को भेज दिए गए.

किसी और की लिखावट में भेजे गए 66 प्रश्नों की बरामदगी के बाद शाह को भी 26 मई को गिरफ्तार कर लिया गया.

एजेंसी को मंधारे और हवलदार के बीच आगे भी मिलीभगत मिली. चार्जशीट में आरोप लगाया गया कि 27 अप्रैल को मंधारे एक NEET उम्मीदवार की मां को अपने ऑफिस लेकर आई. मंधारे ने उस महिला को अपनी दोस्त के रूप में बताया और इसके बाद फिजिक्स का प्रश्नपत्र आगे पहुंचाने में भी मदद की. उनके अनुरोध और उनकी आपसी सहमति के अनुसार, हवलदार ने शाह की लिखावट में मौजूद 66 प्रश्न अपने ऑफिस के कंप्यूटर में ट्रांसफर किए और 25,000 रुपये के बदले उस दस्तावेज का प्रिंटआउट उस महिला को दे दिया.

घटनाओं की पूरी कड़ी हवलदार के ऑफिस के CCTV फुटेज में रिकॉर्ड हो गई. एजेंसी ने यह फुटेज दिल्ली की फास्ट-ट्रैक कोर्ट के सामने पेश किया है.

हवलदार को भेजने से पहले शाह द्वारा तैयार किए गए कुल 68 प्रश्नों में से 66 प्रश्न कम से कम एक मास्टर सेट से मेल खाते पाए गए. कैलाश नाम के एक मास्टर सेट में 20 प्रश्न ऐसे थे जो लीक हुए सेट के प्रश्नों से काफी मिलते-जुलते थे. वहीं शिवालिक नाम के दूसरे मास्टर सेट में ऐसे 22 प्रश्न थे. दो और मास्टर सेट थे. मास्टर SET-02 में 14 ऐसे प्रश्न थे जो लीक हुए सेट के प्रश्नों से काफी मिलते-जुलते थे, जबकि मास्टर SET-03 में आठ प्रश्न ऐसे थे जो लीक हुए सेट के प्रश्नों से काफी मिलते-जुलते थे.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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