Friday, 27 May, 2022
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घोड़ा, फारसी बिल्लियां, 10 करोड़ के गिफ्ट : ‘ठग’ के कारण कैसे ईडी के शिकंजे में घिरी जैकलीन फर्नांडीज

ईडी ने कथित तौर पर सुकेश चंद्रशेखर, जिसकी लंबी क्रिमिनल हिस्ट्री है, के 200 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट में अभिनेत्री को एक गवाह और संभावित ‘लाभार्थी’ के तौर पर टैग किया है.

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नई दिल्ली: श्रीलंकाई अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीज की मुश्किलें तबसे खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं जबसे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उनकी पहचान कथित तौर पर सुकेश चंद्रशेखर द्वारा चलाए जा रहे 200 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट की गवाह और संभावित ‘लाभार्थी’ के तौर पर की है.

इस मामले में चार्जशीट में उल्लेख किया गया है कि अभिनेत्री को 2017 से जेल में बंद इस महाठग से 10 करोड़ रुपये तक की कई असाधारण चीजें उपहार के तौर पर मिली हैं. फर्नांडीज और चंद्रशेखर की उस समय की कुछ फोटो भी वायरल हो रही हैं जब इस वर्ष के शुरू में वह जमानत पर जेल से बाहर आया था.

ईडी की तरफ से लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) जारी किए जाने के बाद गत रविवार को फर्नांडीज को उस समय मुंबई एयरपोर्ट पर रोक लिया था जब वह से मस्कट जाने वाली फ्लाइट पर सवार होने वाली थीं. फिर उन्हें दिल्ली बुलाया गया, जहां वे बुधवार को पूछताछ के लिए ईडी के सामने पेश हुई. पहले भी कई मौकों पर चंद्रशेखर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनसे पूछताछ हो चुकी है.

करीब 7,000 पन्नों की चार्जशीट में बताया गया है कि चंद्रशेखर ने फर्नांडीज को 52 लाख रुपये का एक अरबी घोड़ा, नौ-नौ लाख की कीमत वाली तीन फारसी बिल्लियां, हीरे के सेट और अन्य उपहार दिए थे. उसने चार्टर्ड विमानों के लिए भी भुगतान किया. और पुलिस सूत्रों के मुताबिक, ईडी ने फर्नांडीज के भाई-बहनों के नाम पर कुछ वित्तीय लेनदेन का ङी पता लगाया है. एक सूत्र ने दिप्रिंट को बताया कि चंद्रशेखर ने फर्नांडीज को एक द्वीप देने का भी दावा किया है.

चार्जशीट में एक्ट्रेस नोरा फतेही का भी जिक्र है, क्योंकि चंद्रशेखर ने ईडी के समक्ष दावा किया है कि उसने उन्हें बीएमडब्ल्यू कार गिफ्ट की थी.

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कौन है ये कथित महाठग और कैसे इसकी वजह से बॉलीवुड सेलेब्रिटी जांच के घेरे में आए? दिप्रिंट इन मामलों के साथ ही बता रहा है कि कैसे जेल कर्मचारियों ने कथित तौर पर जबरन वसूली के रैकेट में मदद की.


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बॉलीवुड सितारे थे ‘विशेष लाभार्थी’

चंद्रशेखर के वकील अनंत मलिक ने दिप्रिंट को बताया कि उनके मुवक्किल, जो शादीशुदा है, और जैकलीन फर्नांडीज के बीच प्रेम संबंध थे. मलिक ने बताया, ‘सुकेश और जैकलीन के बीच सात-आठ महीने तक अच्छे संबंध रहे थे, जब तक कि उसे धोखाधड़ी के मामले में फिर से गिरफ्तार नहीं किया गया.’ वकील ने पहले भी कहा था कि फर्नांडीज और फतेही दोनों ही इस मामले में ‘विशेष लाभार्थी’ रही हैं और ‘इसलिए उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है.’

फतेही ने कहा था कि वह एक ‘पीड़ित’ हैं और केवल एक कार्यक्रम के दौरान चंद्रशेखर और उनकी पत्नी लीना मारिया पॉल से मिली थीं. फर्नांडीज ने भी आरोपों और उन्हें ‘बदनाम’ करने की कथित कोशिशों का जोरदार ढंग से खंडन किया है.

फर्नांडीज के प्रवक्ता ने मीडिया को बताया, ‘जैकलीन फर्नांडीज को ईडी की तरफ से बतौर गवाह बयान देने के लिए बुलाया जा रहा है. उन्होंने विधिवत अपने बयान दर्ज कराए हैं और भविष्य में भी जांच में एजेंसी का पूरा सहयोग करेंगी. जैकलीन इस केस में शामिल जोड़े के साथ संबंधों को लेकर बदनाम करने वाले आरोपों का पूरी तरह खंडन करती हैं.’

रिपोर्ट्स के मुताबिक, चंद्रशेखर के साथ जैकलीन की ताजा तस्वीर इसी साल अप्रैल-जून के दौरान की है, जब वह जमानत पर बाहर था.

आपराधिक धंधा चलाने का ‘हेडक्वार्टर’ बना जेल

32 वर्षीय चंद्रशेखर 2017 से ही जेल में हैं, लेकिन जेल की सलाखें उसे इन सालों में भी कथित तौर पर अपराध के नए अवसर तलाशने से रोक नहीं पाईं.

बेंगलुरु का यह शख्स 2017 में तब सुर्खियों में आया जब क्राइम ब्रांच ने उसे चुनाव आयोग रिश्वतखोरी मामले में गिरफ्तार किया. चंद्रशेखर ने कथित तौर पर अन्नाद्रमुक नेता टी.टी.वी. दिनाकरन और जे. जयललिता की सहयोगी वी.के. शशिकला की तरफ से बिचौलिये की भूमिका निभाई थी, जो चाहते थे कि चुनाव आयोग ‘दो पत्ती’ वाले चुनाव चिन्ह (जिस पर पार्टी गुटबाजी में जारी थी) के संबंध में उनकी याचिका पर उनके पक्ष में आदेश दे. दिनाकरन ने कथित तौर पर चुनाव आयोग के अधिकारियों को रिश्वत देने के लिए चंद्रशेखर को 50 करोड़ रुपये का भुगतान किया था. 26 अप्रैल 2017 को पुलिस ने चंद्रशेखर को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन बताया जाता है कि इसके बावजूद उसकी ठगी वाली गतिविधियों में कोई रुकावट नहीं आई.

बताया जाता है कि जेल में बंद रहने के दौरान चंद्रशेखर ने कथित तौर पर अपनी पत्नी (मद्रास कैफे अभिनेत्री लीना पॉल), अन्य हाई-प्रोफाइल कैदियों और यहां तक कि जेल कर्मचारियों की मदद से वसूली का एक नया रैकेट बनाया. इसी क्रम में चंद्रशेखर और उसके सहयोगियों ने कथित तौर पर फोर्टिस हेल्थकेयर और रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटरों मलविंदर और शिविंदर सिंह के परिवार से 200 करोड़ रुपये की उगाही की थी, जो खुद 2019 में वित्तीय धोखाधड़ी के आरोप में फंसे हैं. चंद्रशेखर ने कथित तौर पर खुद को देश के विधि सचिव अनूप कुमार के तौर पर पेश किया, और पैसे लेकर मामले को निपटाने का वादा किया था.

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने चंद्रशेखर के खिलाफ शिविंदर सिंह की पत्नी अदिति सिंह की शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसमें अदिति ने कहा था कि उन्हें 2020 और 2021 में धोखाधड़ी करने वालों की तरफ से व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर कई कॉल किए गए थे. दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार, चंद्रशेखर ने कॉल करने के लिए स्पूफिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए दो नंबरों का इस्तेमाल किया—एक दिल्ली से और एक इजराइल से. उसके पास से कई फोन बरामद किए गए हैं.

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की 2 नवंबर की चार्जशीट में कहा गया है कि रैकेट में 14 लोग शामिल थे. इसने यह भी नोट किया कि तिहाड़ जेल के अधिकांश कैदियों के विपरीत चंद्रशेखर को वहां उपलब्ध मोबाइल फोन और अन्य सुविधाओं तक असीमित पहुंच हासिल थी. आरोपपत्र में बताया गया है कि चंद्रशेखर ने जेल कर्मचारियों को लाखों रुपये की रिश्वत दी, जिन्हें अब निलंबित और गिरफ्तार किया जा चुका है. इसमें जेल उपाधीक्षक डीएस मीणा भी शामिल हैं. पुलिस के मुताबिक, मीणा ने सह-आरोपी दीपक और प्रदीप रमनानी से करोड़ों की राशि प्राप्त की, और फिर उन्हें रैकेट चलाने के लिए अन्य जेल अधिकारियों की मदद लेने की छूट दे दी. चार्जशीट में कहा गया है कि मीणा तो घंटों तक अपने दफ्तर के साथ चंद्रशेखर बैठे रहते थे.

चंद्रशेखर, लीना पॉल और अन्य आरोपियों ने कथित तौर पर हवाला चैनलों का इस्तेमाल करके ठगी गई राशि को करीब 53 मुखौटा कंपनियों में ट्रांसफर किया था. ईडी ने एक रॉल्स रॉयस, एक बेंटले, एक फेरारी और एक लेम्बोर्गिनी सहित 16 लग्जरी और स्पोर्ट्स कारें जब्त की हैं और साथ ही चंद्रशेखर के चेन्नई स्थित सी-फेसिंग बंगले से कई महंगे डिजाइनर सामान भी जब्त किए गए हैं. चंद्रशेखर ने कथित तौर पर क्रिप्टोकरेंसी में भी निवेश किया था.

चंद्रशेखर के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) लगाया गया है. उसके खिलाफ पहले से ही कई राज्यों में लोगों को ठगने के 19 से अधिक मामले (पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार विचाराधीन) दर्ज हैं.


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फिल्मों, कारों का शौकीन, नकल उतारने में माहिर

सुकेश चंद्रशेखर का जन्म कर्नाटक के बेंगलुरु में एक निम्न मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था, लेकिन वह छोटी उम्र से ही पैसे बनाने की जुगाड़ में लगा रहता था. पुलिस के मुताबिक, जब 10वीं कक्षा में था तभी उसने स्कूल छोड़ दिया था और 17 साल की उम्र तक आते-आते उसने पैसे बनाने के लिए लोगों को ठगना शुरू कर दिया था. वह आमतौर पर खुद को किसी अन्य व्यक्ति के तौर पर पेश कर लोगों को ठगता था. सूत्रों ने कहा कि फिल्मों और कारों का शौकीन चंद्रशेखर हमेशा ‘ऐशो-आराम से भरी शानदार जिंदगी’ जीने का सपना देखता था.

दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि चंद्रशेखर ‘बहुत लोगों से कनेक्शन रखने वाला और टेक-सैवी’ है और ‘किसी को भी ठग सकता है’ लेकिन उसके पुलिस के हत्थे चढ़ने का भी एक लंबा इतिहास रहा है.

उसके खिलाफ पहला मामला 2007 में दर्ज किया गया था, जब उसने कथित तौर पर खुद को कर्नाटक के तत्कालीन सीएम एच.डी. कुमारस्वामी के बेटे का मित्र बताकर एक पुराने पारिवारिक मित्र से 1.14 करोड़ रुपये ठगे थे. उसने इन पैसों का इस्तेमाल कारों, घड़ियों, आभूषणों और एक टीवी सेट खरीदने पर किया. इंडियन एक्सप्रेस की 2013 की एक रिपोर्ट बताती है कि किशोरावस्था में ही उसने ड्राइविंग लाइसेंस हासिल करने के लिए कथित तौर पर कर्नाटक में तत्कालीन पुलिस आयुक्त के जाली हस्ताक्षर तक कर दिए थे.

इसके बाद के कई सालों में उसने खुद को कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा का सचिव बताकर न जाने के कितने कारोबारियों को ठगा. केरल में उसने एक कार्यक्रम में कैटरीना कैफ को लाने के वादे के साथ कथित तौर पर कोच्चि स्थित इमैनुएल सिल्क्स से 20 लाख रुपये ठगे. अन्य राजनेताओं और नौकरशाहों की तरह उसने खुद को एक बार एम. करुणानिधि के पोते और द्रमुक नेता टी.आर. बालू के बेटे के तौर पर भी पेश किया.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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