पणजी, 10 अप्रैल (भाषा) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि संसद की विशेष बैठक में सभी राजनीतिक दलों के सहयोग से महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन सर्वसम्मति से पारित कर दिया जाएगा।
बिरला ने यह भी कहा कि सदन और संसद परिसर के भीतर असंसदीय शब्दों का प्रयोग और बैनर-पोस्टर प्रदर्शित करना निषिद्ध है; और प्रयुक्त भाषा संसदीय परंपराओं के अनुरूप होनी चाहिए।
महिला आरक्षण अधिनियम के नाम से चर्चित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन के बारे में पूछे जाने पर अध्यक्ष ने कहा कि यह कानून सितंबर 2023 में नयी संसद में पारित होने वाला पहला कानून था, जब सभी राजनीतिक दलों ने इसका समर्थन किया था और इसे सर्वसम्मति से पारित किया गया था।
उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में ‘पीटीआई-भाषा’ के एक प्रश्न के उत्तर में कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन संसद में सभी के सहयोग से सर्वसम्मति से किया जाएगा।’’
संसद का बजट सत्र बढ़ा दिया गया है और 16 से 18 अप्रैल के बीच विशेष बैठकें होंगी।
महिला आरक्षण अधिनियम के अनुसार लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 816 हो जाएगी जिनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान 2023 में संविधान संशोधन के माध्यम से लाया गया था, लेकिन यह 2027 की जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रभावी होगा।
यदि वर्तमान कानून यथावत रहता है, तो इसके 2034 में ही लागू होने की उम्मीद है, इसलिए इसे 2029 के आम चुनावों से लागू करने के लिए इसमें संशोधन करना आवश्यक है।
इससे पहले, ‘कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन’ (सीपीए) ‘इंडिया रीजन वेस्ट जोन (जोन सात) के सम्मेलन में समापन भाषण देते हुए बिरला ने कहा कि महिलाओं की अधिक भागीदारी से शासन में अधिक संवेदनशीलता आएगी, जिससे नीति निर्माण अधिक जनकेंद्रित और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप होगा।
उन्होंने कहा कि महिलाएं पहले से ही विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्वकारी भूमिका निभा रही हैं और शासन एवं विकास में एक नया और रचनात्मक दृष्टिकोण प्रदान कर रही हैं।
भाषा संतोष अविनाश
अविनाश
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