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Saturday, 7 March, 2026
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घर खरीदारों से ‘धोखाधड़ी’: ईडी ने रियल एस्टेट कंपनी की 200 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क की

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नयी दिल्ली, छह मार्च (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को कहा कि उसने घर खरीदारों से कथित धोखाधड़ी से जुड़े धनशोधन जांच के तहत दिल्ली स्थित रियल एस्टेट कंपनी टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की 200 करोड़ रुपये से अधिक की नयी अचल संपत्तियां कुर्क की है।

केंद्रीय जांच एजेंसी ने एक बयान में कहा कि अस्थायी रूप से कुर्क की गई संपत्तियों में हरियाणा के सोनीपत जिले के कामासपुर में स्थित 8.3 एकड़ जमीन और व्यावसायिक इकाइयां शामिल हैं। उसने कहा कि ये संपत्तियां टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (पूर्व में इंटाइम प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड) और उसकी सहयोगी कंपनियों के स्वामित्व में हैं।

उसने कहा कि कुर्क की गई संपत्तियों का मूल्य 206.4 करोड़ रुपये आंका गया है।

ईडी की कार्रवाई पर टिप्पणी के लिए कंपनी से तुरंत संपर्क नहीं हो सका।

ईडी ने दिल्ली पुलिस और उसकी आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा कंपनी, उसके प्रर्वतकों और प्रमुख प्रबंधकीय कर्मियों के खिलाफ दर्ज 26 प्राथमिकी और आरोपपत्रों का संज्ञान लेते हुए धन शोधन निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।

एजेंसी के अनुसार, उन पर आरोप है कि उन्होंने निर्धारित समयसीमा के भीतर वादे के मुताबिक फ्लैट और इकाइयां उपलब्ध नहीं कराकर कई घर खरीदारों को धोखा दिया और ठगी की। एजेंसी ने कहा कि यहां तक ​​कि एक परियोजना में 16 से 18 साल की देरी भी हुई।

एजेंसी के अनुसार, टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने सोनीपत में कई वाणिज्यिक, आवासीय और हाउसिंग परियोजनाएं शुरू कीं और 23 परियोजनाओं में 14,105 ग्राहकों से अग्रिम बुकिंग राशि के रूप में 4,619.43 करोड़ रुपये एकत्र किए। एजेंसी के अनुसार, ये परियोजनाएं 2005 और 2014 के बीच शुरू की गई थीं।

हालांकि, ईडी का आरोप है कि चार परियोजनाओं के लिए अभी तक ‘कब्जे के प्रमाण पत्र’ जारी नहीं किए गए हैं और एक परियोजना, ‘पार्क स्ट्रीट’, अभी भी अधूरी है।

उसने कहा कि जांच में पाया गया है कि प्रवर्तकों और निदेशकों ने घर खरीदारों से एकत्र की गई बड़ी रकम को आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने के बजाय, जमीन खरीदने और अन्य उद्देश्यों के लिए सहायक कंपनियों, पूर्व सहायक कंपनियों और भूमि-मालिक कंपनियों को अग्रिम के रूप में दे दिया।

ईडी ने कहा है कि कंपनी ने अपने ऋणों को चुकाने और निवेश करने के लिए भी ग्राहकों के धन का उपयोग किया था।

ईडी ने कहा है कि धन को निर्धारित उद्देश्य के इतर इस्तेमाल करने से अंततः कंपनी की निर्माण से जुड़ी परियोजनाओं में देरी हुई, जिससे ग्राहकों को समय पर अपनी इकाइयों या भूखंडों पर कब्जा नहीं मिल पाया।

एजेंसी ने पहले इस मामले में 45 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की थी और नवीनतम आदेश के साथ, इस मामले में अब तक कुल 251.88 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की गई है।

भाषा अमित संतोष

संतोष

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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