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Monday, 22 April, 2024
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सोलर पैनल, नई टेलीकॉम साइट्स—हिमाचल के दूरदराज के जिलों तक कनेक्टिविटी बढ़ाने पर विचार कर रहा ट्राई

ट्राई ने सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में लाहौल और स्पीति, मंडी, कुल्लू और चंबा जैसे जिलों में कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्य के अधिकरणों के बीच परस्पर सहयोग की सिफारिश की है.

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नई दिल्ली: भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने हिमाचल प्रदेश के दूरदराज के इलाकों में रणनीतिक दूरसंचार साइटों पर सौर पैनल लगाने से लेकर रोड इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने तक, डिजिटल कनेक्टिविटी बेहतर बनाने में मदद के लिए कई उपायों की सिफारिश की है.

दूरसंचार नियामक ने सोमवार को ‘हिमाचल प्रदेश के दूरवर्ती और दूरदराज के जिलों में टेलीकॉम कनेक्टिविटी/इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार’ शीर्षक वाली अपनी एक रिपोर्ट में लाहौल और स्पीति, चंबा, कुल्लू और मंडी को राज्य के ‘सबसे ज्यादा प्रभावित राजस्व जिलों’ के रूप में चिन्हित किया है.

हालांकि, रिपोर्ट में इस शब्द की स्पष्ट तौर पर कोई व्याख्या नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि इसका अर्थ ऐसे जिलों से है, जहां सबसे कम इंटरनेट और टेलीकॉम कनेक्टिविटी है और जो विभाग के लिए सबसे कम राजस्व कमाई वाले जिले हैं.

हिमाचल प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी से सत्ता छीनने और कांग्रेस की सरकार बनने के कुछ ही दिनों बाद इस रिपोर्ट में ट्राई ने कहा कि केंद्रीय दूरसंचार विभाग (डॉट) और राज्य सरकार को आवेदन मिलने के 15 दिनों के भीतर बिजली कनेक्शन सुनिश्चित करना चाहिए.

रिपोर्ट में यह सुझाव भी दिया गया है कि दूरसंचार कनेक्शनों को किसी भी तरह की क्षति के लिए सड़क मरम्मत ठेकेदारों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए. साथ ही यह सिफारिश की गई है कि डॉट के यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (यूएसओएफ) डिवीजन को नए नेटवर्क के निर्माण पर होने वाले व्यय का वित्तपोषण करना चाहिए.

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2003 में वैधानिक दर्जा हासिल करने वाले यूएसओएफ की शुरुआत दूरवर्ती और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को उचित और सस्ती दरों पर ‘बुनियादी’ टेलीग्राफ सेवाएं मुहैया कराने के उद्देश्य के साथ की गई थी.

‘सबसे ज्यादा प्रभावित राजस्व जिलों’ को कवर करना

रिपोर्ट में बताया गया है कि इन सिफारिशों में ट्राई के अलावा, हिमाचल प्रदेश सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (डीआईटी), राज्य सरकार के अफसरों, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं, भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड (बीबीएनएल) और स्थानीय उपभोक्ता प्रतिनिधियों ने सामूहिक रूप योगदान दिया है.

रिपोर्ट में बताया गया है, गैप एनालिसिस—कनेक्टिविटी में विसंगतियों वाले मुख्य क्षेत्रों का पता लगाने—के बाद इन हितधारकों ने सुझाव दिया है कि ‘तीन राजस्व जिलों लाहौल और स्पीति, कुल्लू और चंबा के 25 अनकवर्ड गांवों को दूरसंचार बुनियादी ढांचा और कनेक्टिविटी मुहैया कराने के लिए जरूरी ‘पूंजीगत व्यय (कैपएक्स) और परिचालन व्यय (ऑपएक्स)’ का वित्तपोषण सरकार यूएसओएफ के माध्यम से करे.

ट्राई ने अपनी सिफारिशों में कहा है, ‘यह सुझाव दिया जाता है कि यूएसओएफ को कनेक्टिविटी में छूटे गांवों के जमीनी स्तर सर्वेक्षण के बाद इन 25 अनकवर्ड गांवों को 4जी सुविधा मुहैया कराने के लिए तुरंत अपने 20 प्रतिशत अतिरिक्त दायरे में शामिल करना चाहिए.’ साथ ही जोड़ा कि दूरसंचार नियामक इस संबंध में विस्तृत निवेश योजना तैयार करेगा.


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बिजली कनेक्शन, सड़कें, नया टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर

रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया कि निर्माण स्थलों में बिजली की कमी और दूरसंचार नेटवर्क को नुकसान जैसे मुद्दों को हल करने के लिए केंद्र और राज्य के अधिकरणों को मिलकर काम करने की जरूरत है.

ट्राई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, ‘डॉट को यूटिलिटी/औद्योगिक टैरिफ पर प्राथमिकता के आधार पर (कनेक्शन के अनुरोध के 15 दिनों के भीतर) दूरसंचार साइटों को बिजली सुविधा प्रदान करने पर विचार करने के लिए राज्य सरकार के साथ बात करनी चाहिए.’

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘दूरदराज के और पहाड़ी क्षेत्रों (लाहौल और स्पीति, मंडी, कुल्लू और चंबा जिलों सहित) में दूरसंचार साइटों के लिए बिजली कनेक्शन के विस्तार के लिए आखिरी स्तर पर इंस्टॉलेशन चार्ज माफ करने पर विचार के लिए डॉट को हिमाचल प्रदेश की राज्य सरकार के साथ भी बात करनी चाहिए.’

इसमें कहा गया है, नियामक ‘इन क्षेत्रों में दूरसंचार सेवाओं के शुरुआती रोल-आउट की सुविधा प्रदान करेगा और डिजिटल विसंगति दूर करने में मदद करेगा.’

रिपोर्ट में कहा गया है कि उन जगहों पर, जहां सड़कें बन रही हैं, राज्य सरकार के साथ-साथ भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) जैसे अधिकरणों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी तरह के नुकसान के लिए ठेकेदारों को जवाबदेह ठहराया जाए.

ट्राई ने यह सुझाव भी दिया है कि डॉट, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय और हिमाचल प्रदेश सरकार को ‘दूरवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों में रणनीतिक दूरसंचार साइटों’ पर सौर पैनल लगाने के लिए एक योजना के साथ आगे आना चाहिए.

ट्राई ने कहा, ‘डॉट को राज्य सरकार, एनएचएआई और बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सड़क निर्माण, सड़क चौड़ीकरण या अन्य संबंधित कार्यों के दौरान टीएसपी (दूरसंचार सेवा प्रदाताओं) के साथ शुरू में ही कोआर्डिनेशन (पूर्व सूचना के माध्यम से) स्थापित किया जाए और टेलीकॉम नेटवर्क को नुकसान का भुगतान करना ठेकेदार के कांट्रैक्ट का हिस्सा हो.’

रिपोर्ट में कहा गया है कि डॉट को भविष्य में सड़कों के चौड़ीकरण और नई सड़कों की निर्माण परियोजनाओं के दौरान यूटिलिटी डक्ट के निर्माण की संभावना तलाशने के लिए राज्य सरकार के साथ संपर्क करना चाहिए.

यूटिलिटी डक्ट जमीन के अंदर या ऊपर बना एक ऐसा पैसेज है जिसमें बिजली, पानी की आपूर्ति, सीवर संबंधी कार्यों और संचार लाइनों के लिए उपयोगी लाइनें होती हैं.

ट्राई ने अपनी रिपोर्ट में आगे कहा, ‘इससे राज्य में दूरसंचार सहित तमाम उपयोगी बुनियादी ढांचे का जल्द से जल्द रोलआउट संभव हो सकेगा.’

(अनुवाद: रावी द्विवेदी | संपादन: ऋषभ राज)

(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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