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Thursday, 24 September, 2026
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छात्रा की हिरासत के मामले में नोएडा की जिलाधिकारी के खिलाफ उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक

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नयी दिल्ली, 23 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम को अप्रैल में नोएडा में हुए मजदूरों के विरोध-प्रदर्शन के सिलसिले में छात्रा आकृति चौधरी को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत में रखने के लिए अपने वेतन से पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था।

न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने रूपम की याचिका पर नोटिस जारी किया और चौधरी की हिरासत को रद्द करने के उच्च न्यायालय के निर्देश पर रोक लगा दी।

शीर्ष अदालत ने रूपम और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दायर दो अलग-अलग याचिकाओं पर ये अंतरिम आदेश पारित किए।

संक्षिप्त सुनवाई के दौरान, पीठ ने जिलाधिकारी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी की दलीलें सुनीं। इसके बाद अदालत ने वीडियो कॉन्फ्रेंस से हो रही सुनवाई की आवाज ‘म्यूट’ (बंद) कर दी।

पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश में जिलाधिकारी के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर भी रोक लगा दी।

अदालत ने आदेश दिया, ‘‘सभी पक्षों के वरिष्ठ वकीलों को सुनने के बाद, इस अदालत की राय है कि जब तक मामले की गुण-दोषों के आधार पर सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक फैसले के अमल पर, विशेष रूप से पैरा नंबर 27 से 33 तक, रोक रहेगी।’’

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए सात अक्टूबर की तारीख तय की।

उच्च न्यायालय ने दो सितंबर को दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास की स्नातक 25 वर्षीय आकृति चौधरी की हिरासत को रद्द कर दिया था, जिसे अप्रैल में नोएडा में हुए मजदूरों के विरोध-प्रदर्शन के सिलसिले में एनएसए के तहत हिरासत में लिया गया था।

भाषा वैभव खारी

खारी

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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