नयी दिल्ली, नौ मार्च (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को आबकारी नीति मामले में सीबीआई के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने के निचली अदालत के आदेश पर रोक लगा दी। इसके साथ ही अदालत ने एजेंसी की याचिका पर पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और 22 अन्य से अपना पक्ष बताने को कहा।
सभी 23 आरोपियों को नोटिस जारी करते हुए न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि आरोप तय करने के चरण में निचली अदालत की कुछ टिप्पणियां और निष्कर्ष ‘प्रथम दृष्टया गलत प्रतीत होते हैं और उन पर विचार करने की आवश्यकता है’।
न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के अधिकारी के खिलाफ ‘कड़ी टिप्पणी’ के लिए दिए गए कारण प्रथम दृष्टया बुनियादी रूप से गलत थे। उन्होंने कहा कि यह टिप्पणी आरोप के चरण में ही की गई।
अदालत ने अपने आदेश में कहा, ‘कहने की जरूरत नहीं है, इस स्तर पर, ऐसी टिप्पणियों को पारित करने के लिए दिए गए कारण को भी वर्तमान याचिका में चुनौती दी गयी है और इस अदालत के विचार के अनुसार उस पर गौर करने की आवश्यकता है। उपरोक्त के मद्देनजर, केवल जांच अधिकारी तक सीमित टिप्पणियों पर सुनवाई की अगली तारीख तक रोक लगाई जाती है, जिसमें उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश करने का निर्देश भी शामिल है।’
अदालत ने मामले को 16 मार्च को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया और निर्देश दिया कि केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और अन्य तब तक अपना जवाब दाखिल करें।
भाषा तान्या अविनाश
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