Thursday, 11 August, 2022
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क्या एचसीक्यू की जगह ले सकता है अश्वगंधा, कोरोना के खिलाफ ये कितना कारगर है इसका शोध करा रही है मोदी सरकार

आयुष मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) और आईसीएमआर के कई वैज्ञानिक मिलकर इस स्टडी पर काम कर रहे हैं.

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नई दिल्ली: कोरोनावायरस के ख़िलाफ़ पहले से मौजूद कई दवाओं, वैक्सीन और नुस्खों का इस्तेमाल किया जा रहा है. इस पहल में सबसे ताज़ा कदम अंग्रेज़ी दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन (एचसीक्यू) बनाम आर्युवैदिक दवा अश्वगंधा से जुड़े एक रिसर्च का होगा. केंद्र की मोदी सरकार इस बारे में स्टडी करा रही है कि क्या एचसीक्यू का काम अश्वगंधा कर सकती है.

कोविड-19 के ख़िलाफ़ एचसीक्यू का इस्तेमाल एक प्रतिरोधात्मक दवा के तौर पर किया जा रहा है. ज़्यादातर मामलों में ये स्वास्थ्यकर्मियों को दी जाती है.

आयुष मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) और इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के कई वैज्ञानिक मिलकर कोविड-19 के वैकल्पिक इलाज पर काम कर रहे हैं. ऐसी ही एक स्टडी में इसका पता लगाने का काम किया जा रहा है कि क्या इसमें एचसीक्यू का विकल्प अश्वगंधा हो सकता है.


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यूजीसी के वाइस चेरयमैन भूषण पटवर्धन इससे जुड़ी टास्कफोर्स के प्रमुख हैं. उन्होंने दिप्रिंट से कहा, ‘हम कोविड-19 के ऊपर अश्वगंधा के असर को देखना चाहते हैं. हम ये भी देखना चाहते हैं कि क्या ये एचसीक्यू वाला काम कर सकती है’.

उन्होंने कहा, ‘अश्वगंधा जैसी बूटी को इसके औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है और ऐसी स्टडी पहले से मौजूद है जो बताती है कि ये इम्युनिटी बढ़ाने का काम करती है.’

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उन्होंने कहा, ‘हम इसका देशभर में पहली पंक्ति में अपनी सेवा दे रहे, चुने हुए 400 स्वास्थ्यकर्मियों पर टेस्ट करेंगे. आधों को अश्वगंधा और आधों को एचसीक्यू दिया जाएगा और हम देखेंगे कि इसके कैसे परिणाम आते हैं.’

‘कोई साइड-इफेक्ट नहीं’

इम्युनिटी बेहतर करने को लेकर चूहों पर की गई एक स्टडी में अश्वगंधा को लेकर ये बात साबित हुई है कि ये माइलोसप्रेशन (एक प्रक्रिया जिसकी वजह से बोन मैरो की गतिविधियों धीमी पड़ जाती है और ब्लड सेल का उत्पादन कम हो जाता है) को घटाता है.

आयुष मंत्रालय के सचिव आयुष रंजन कोटेचा ने भी इस मामले में इसी स्टडी का हवाला दिया. उन्होंने दिप्रिंट से कहा, ‘एक बड़े ही प्रतिष्ठित जर्नल ने एक स्टडी पब्लिश की है जिसमें इम्युनो-मॉड्यूलेटर के तौर पर अश्वगंधा की तुलना एचसीक्यू से की गई है और सामने आया कि दोनों ही एक जैसा असर करते हैं.’

उन्होंने कहा, ‘अश्वगंधा से जुड़े काफ़ी सारे साक्ष्य मौजूद हैं. हालांकि, मैं इसे लेकर पहले से सावधानी बरतते हुए ये कहना चाहूंगा कि ऐसा पहले से ही नहीं मान लिया जाना चाहिए कि ये दवा काम करेगी. जैसा की एचसीक्यू का एहतियातन इस्तेमाल किया जा रहा है, हम पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या अश्वगंधा का भी वैसा ही प्रभाव हो सकता है. एक अच्छी बात ये है कि एचसीक्यू की तुलना में इसका कोई भी साइड इफ़ेक्ट नहीं होगा.’

उन्होंने ये भी कहा, ‘इसे टेस्ट करने के लिए अलग-अलग स्टडी का प्लान है. हमने क्लीनिकल प्रोटोकॉल बनाने की मजबूत कवायद शुरू की है. अध्ययन में वैज्ञानिकों का एक समूह शामिल है, आईसीएमआर द्वारा तकनीकी रूप से मदद प्राप्त बहुत से समीक्षकों द्वारा इसका विश्लेषण किया जा रहा है. इस स्टडी के लिए हम कई मेडिकल कॉलेजों के साथ काम कर रहे हैं. आने वाले हफ्ते में ये शुरू हो जाएगा और इसे पूरा करने के लिए 12 हफ्ते का समय तय किया गया है यानी ये स्टडी 3 महीने में आ जाएगी.’


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आपको बता दें कि भारत से लेकर अमेरिका तक ने अपने नागरिकों को एचसीक्यू के इस्तेमाल को लेकर आगाह किया है. आईसीएमआर ने मार्च में भारत के लोगों को आगाह किया था कि इस दवा का इस्तेमाल ‘प्रयोग’ के तौर पर किया जा रहा है. आईसीएमआर के महामारी विज्ञान के प्रमुख डॉक्टर रमन गंगाखेड़कर ने 25 मार्च को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, ‘इस दवा को डॉक्टर की सलाह के बग़ैर नहीं लिया जाना चाहिए.’

इसी तर्ज़ पर अमेरिका के फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (यूएस एफ़डीए) ने अप्रैल में अपने नागरिकों को इसकी चेतावनी दी थी कि वो ख़ुद से ‘ना तो सिर्फ़ एचसीक्यू या एचसीक्यू और एडिथ्रोमाइसिन के कॉम्बिनेशन’ का इस्तेमाल करें. एक बयान में एफ़डीए ने कहा था, ‘एचसीक्यू के ऐसे उत्पाद जिन्हें इंसानों को नहीं इस्तेमाल करना, उसका भी उनके द्वारा इस्तेमाल किए जाने के बाद इसके ज़हरीले असर और उससे मौत की गंभीर जानकारी सामने आई है.’

हालांकि, अश्वगंधा का ऐसा कोई साइड इफेक्ट नहीं होता.

बाबा रामदेव की पतंजलि द्वारा किए गए एक और रिसर्च में ये बात निकलकर सामने आई है कि अश्वगंधा कोविड-19 इंफेक्शन से बचाता है. इस रिसर्च को पीर रिव्यू के लिए जर्नल वायरोलॉजी के पास जमा कराया गया है.

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