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Tuesday, 20 January, 2026
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HC ने सड़क दुर्घटना में मृत महिला के परिवार को मुआवजा दोगुना किया: ‘गृहिणी की भूमिका अहम’

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने शिल्पा जैन के ‘अवर्णनीय कष्ट’ के लिए 15 लाख रुपए का मुआवजा भी दिया. जैन तीन साल तक वेजेटेटिव स्टेट में रहीं. 2017 में उनकी मौत हो गई.

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गुरुग्राम: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते आदेश में कहा कि परिवार में गृहिणी की भूमिका बहुत अहम होती है और सिरसा की उस महिला के परिवार को मुआवज़ा लगभग दोगुना कर दिया जो सड़क दुर्घटना के बाद तीन साल तक वेजेटेटिव स्टेट में रहीं और बाद में मर गईं.

कोर्ट ने गृहिणी की काल्पनिक आय 15,000 रुपए प्रति माह तय की और उनके ‘अवर्णनीय कष्ट’ के लिए 15 लाख रुपए मुआवजा दिया.

न्यायमूर्ति सुदीप्ति शर्मा ने 15 जनवरी को सिरसा मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MCAT) द्वारा पहले दिए गए 58.22 लाख रुपए के मुआवजे को बढ़ाकर 1.18 करोड़ रुपए कर दिया. यह मुआवजा शिल्पा जैन के परिवार की अपील पर दिया गया.

शिल्पा की 21 नवंबर 2017 को मृत्यु हो गईं. वे 8 अक्टूबर 2014 को हुए दुर्घटना के बाद तीन साल तक वेजेटेटिव स्टेट में रहीं.

हाईकोर्ट का यह फैसला सिर्फ मुआवजे की राशि के लिए नहीं, बल्कि गृहिणी के काम की कदर करने और वेजेटेटिव स्टेट में जीने वाले दर्द को मान्यता देने के लिए भी अहम है.

गृहिणी के काम का मूल्य

ट्रिब्यूनल द्वारा शिल्पा जैन की गृहिणी के रूप में आय 9,000 रुपए प्रति माह आंकी गई थी, जिसे न्यायमूर्ति शर्मा ने खारिज कर दिया. उन्होंने जसबीर सिंह बनाम सुर्जीत सिंह मामले का हवाला दिया, जिसमें 2012 के एक हादसे में गृहिणी की काल्पनिक आय 9,000 रुपए प्रति माह तय की गई थी.

महंगाई और जीवन यापन की बढ़ती लागत को देखते हुए न्यायाधीश ने 2014 के लिए इसे 15,000 रुपए प्रति माह “न्यायसंगत और उचित” माना.

फैसले में कहा गया, “गृहिणी का काम सिर्फ देखभाल तक सीमित नहीं है; इसमें पूरे परिवार के लिए भोजन बनाना, राशन और घरेलू सामान लाना, घर और आसपास की सफाई और रखरखाव, वित्तीय योजना और बजट प्रबंधन, बच्चों की देखभाल और शिक्षा, बुजुर्गों की देखभाल, मरम्मत और घर-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं का समन्वय शामिल है.”

“अगर ये सेवाएं खुले बाज़ार में ली जाएं तो इनके लिए अच्छी राशि मिलती, जो गृहिणी की परिवार में स्थिरता बनाए रखने वाली अहम भूमिका को दर्शाती है.”

कोर्ट ने इस आय में 40 प्रतिशत भविष्य की संभावनाएं भी जोड़ीं, जिससे वार्षिक नुकसान 2.52 लाख रुपए हुआ. 17 का गुणक और 100 प्रतिशत विकलांगता मानते हुए भविष्य की आय का नुकसान 42.84 लाख रुपए आया.

भारत में मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) मृत या विकलांग व्यक्ति के लिए मुआवजा तय करने में उम्र और गुणक पद्धति का उपयोग करते हैं. गुणक इस बात पर चुना जाता है कि अगर दुर्घटना नहीं होती तो व्यक्ति कितने साल सक्रिय काम कर सकता था.

दर्द और कष्ट के लिए 15 लाख रुपए

मेडिकल रिकॉर्ड में दिखा कि शिल्पा जैन को गंभीर सिर की चोटें लगी थीं. उनका ऑपरेशन हुआ, वेंटिलेटर पर रखा गया और वे पूर्ण वेजेटेटिव स्टेट में चली गईं. न्यूरोसर्जन डॉ. संजीव राजपूत ने कहा कि उन्हें पाइप के जरिए खिलाया जाता था और वे कोई भी हरकत नहीं कर पा रही थीं.

हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल ने इस हिस्से के लिए “बहुत कम राशि” दी थी. न्यायमूर्ति शर्मा ने इसे 15 लाख रुपए कर दिया. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 2024 के केएस मुरलीधर बनाम आर सुब्बुलक्ष्मी मामले का हवाला दिया.

न्यायमूर्ति सुदीप्ति शर्मा ने कहा, “स्थायी विकलांगता व्यक्ति की सोचने-समझने और शारीरिक क्षमताओं को प्रभावित करती है, और इसके कई अनमापनीय परिणाम होते हैं.”

जज ने कहा, “एक स्वस्थ व्यक्ति का असमर्थ हो जाना, सामान्य संगति से वंचित रहना और उत्पादक जीवन न जी पाना, गरिमा की हानि का कारण बनता है”

देखभाल और मेडिकल खर्च

हाईकोर्ट ने 8 लाख रुपए देखभाल शुल्क के रूप में दिए और ट्रिब्यूनल के 30 लाख रुपए भविष्य के मेडिकल खर्च के फैसले को बरकरार रखा.

बीमा कंपनी ने भविष्य के मेडिकल खर्च को चुनौती दी, यह कहते हुए कि शिल्पा जैन की मृत्यु हो चुकी है, इसलिए कोई भविष्य का खर्च नहीं हो सकता.

न्यायमूर्ति शर्मा ने इसे खारिज किया, सुप्रीम कोर्ट के 2025 के धन्नालाल बनाम नासिर खान मामले का हवाला देते हुए कहा कि पीड़ित के जीवन में हुए मेडिकल खर्च और देखभाल खर्च उनकी संपत्ति का हिस्सा बनते हैं और कानूनी वारिस इसे प्राप्त कर सकते हैं.

संपत्ति का नुकसान उस धन या संपत्ति के नुकसान को कहा जाता है जो मृतक ने जमा कर अपने वारिसों को छोड़ी होती अगर दुर्घटना नहीं होती.

सुप्रीम कोर्ट ने धन्नालाल मामले में कहा था, “पीड़ित ने दुर्घटना के बाद 11 साल वेजेटेटिव स्टेट में जीया. यह पहले ही पीड़ित की संपत्ति का हिस्सा बन चुका है.”

शिल्पा जैन भी तीन साल इसी हालत में रही.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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