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Friday, 27 March, 2026
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उच्च न्यायालय ने मामला रद्द करने के लिए पत्रकार की याचिका पर केरल सरकार, पुलिस से रुख बताने को कहा

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कोच्चि, 23 जून (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने एक प्रमुख मलयालम समाचार चैनल की एक महिला पत्रकार के खिलाफ दर्ज आपराधिक साजिश और मानहानि के मामले को रद्द करने के लिए उनके द्वारा दायर याचिका पर शुक्रवार को राज्य सरकार और पुलिस का रुख जानना चाहा।

यह मामला स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के एक नेता की शिकायत पर दर्ज किया गया था।

न्यायमूर्ति के. बाबू ने राज्य सरकार और पुलिस की ओर से पेश हुए लोक अभियोजक को सुनवाई की अगली तारीख पर पत्रकार की याचिका के सिलसिले में निर्देश के साथ अदालत आने को कहा।

अदालत ने अभियोजन का यह हलफनामा भी दर्ज किया कि याचिका दायर करने वाली पत्रकार के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी।

वामपंथी संगठन एसएफआई के एक छात्र नेता की शिकायत के आधार पर नौ जून को पत्रकार सहित पांच व्यक्तियों के खिलाफ एक मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने एक फर्जी अंक सूची के जरिये उनकी (छात्र नेता की) छवि धूमिल करने की साजिश रची।

पुलिस ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) की छात्र इकाई एसएफआई के प्रदेश सचिव पी. एम. अरशो की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश), 465 (जालसाजी) और 500 (मानहानि) आदि के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की थी।

गौरतलब है कि कांग्रेस की छात्र इकाई केरल स्टूडेंट्स यूनियन (केएसयू) ने एक अंक सूची प्रदर्शित कर आरोप लगाया था कि एर्नाकुलम स्थित महाराजा कॉलेज के छात्र अरशो किसी परीक्षा में शामिल हुए बगैर उत्तीर्ण हो गए। छह जून को इस आरोप के बाद विवाद उत्पन्न हो गया था।

अरशो ने आरोप लगाया कि उनकी छवि धूमिल करने के लिए एक साजिश रची गई।

बाद में, कॉलेज ने स्पष्ट किया कि उनका नाम दूसरे बैच के नतीजे में था और यह एक तकनीकी गड़बड़ी थी।

भाषा सुभाष अविनाश

अविनाश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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