चंडीगढ़, 25 फरवरी (भाषा) कांग्रेस की हरियाणा इकाई ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) में कथित बदलावों के खिलाफ बुधवार को प्रदर्शन किया।
कांग्रेस ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार पर गरीबों के लिए बनी सामाजिक सुरक्षा वाली इस योजना को कमजोर करने का आरोप भी लगाया।
इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के प्रभारी बी के हरिप्रसाद ने किया। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधानसभा में विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह के अलावा कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा सहित पार्टी के अन्य नेता और कई कार्यकर्ता भी इसमें शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस कार्यालय से विरोध मार्च निकाला और राज्य विधानसभा की ओर बढ़ने लगे, लेकिन पुलिस ने उन्हें बीच रास्ते में ही रोक दिया। उनमें से कुछ लोगों को हिरासत में भी ले लिया गया क्योंकि वे लोग केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे तथा आरोप लगा रहे थे कि यह (सरकार) मनरेगा को समाप्त करने का प्रयास कर रही है।
इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने दावा किया कि भाजपा सरकार ने सत्ता में आने के बाद इस योजना को कमजोर कर दिया है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा में मनरेगा के तहत आठ लाख से अधिक श्रमिक पंजीकृत हैं, लेकिन 2024-25 में केवल लगभग 2,100 परिवारों को ही अनिवार्य रूप से निर्धारित 100 दिनों का रोजगार प्राप्त हुआ।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार पर आरोप लगाया कि इसने योजना के तहत निर्धारित पर्याप्त रोजगार और मुआवजा दोनों ही उपलब्ध नहीं कराए हैं।
हुड्डा ने कहा कि केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार द्वारा शुरू की गई मनरेगा योजना का उद्देश्य ग्रामीण रोजगार को मजबूत करना और महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के दृष्टिकोण को पूरा करना था।
उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के बदलावों और केंद्र तथा राज्यों के बीच बजट बंटवारे ने योजना के कार्यान्वयन को कठिन बना दिया है।
भाषा रवि कांत सुरेश
सुरेश
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
