प्रयागराज, एक दिसंबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा कि लाइसेंस धारक द्वारा शस्त्र अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर ही बंदूक का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है, अन्यथा नहीं।
न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह ने योगेन्द्र कुमार नाम के व्यक्ति द्वारा दायर एक रिट याचिका को स्वीकार करते हुए कहा चूंकि अधिकारी शस्त्र अधिनियम के नियम 32 के आवश्यक घटक पूरा करने में विफल रहे, इसलिए याचिकाकर्ता का लाइसेंस रद्द कर उसका हथियार जब्त नहीं किया जा सकता।
शस्त्र अधिनियम के नियम 32 के तहत यह आवश्यक है कि शस्त्र लाइसेंस रद्द करने से पूर्व अधिकारियों को यह निर्णय करना होगा कि क्या संबंधित नियमों का उल्लंघन हुआ है।
इस मामले के तथ्यों के मुताबिक, याचिकाकर्ता को 16 जुलाई, 2005 को रिवॉल्वर का लाइसेंस दिया गया था हालांकि, 22 सितंबर, 2020 को गाजीपुर के जिला मजिस्ट्रेट ने नोटिस जारी कर उसका लाइसेंस निरस्त कर दिया और उसे अपना शस्त्र जमा करने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता ने नोटिस में लगाए गए आरोपों से इनकार कियान लेकिन 17 अगस्त, 2020 को गाजीपुर के थाना प्रभारी द्वारा उसका हथियार जब्त कर लिया गया।
इसके बाद, याचिकाकर्ता ने वाराणसी मंडल के आयुक्त के समक्ष अपील की, जिसे खारिज कर दिया गया।
इसके परिणाम स्वरूप उन्होंने उच्च न्यायालय का रुख किया।
अदालत ने 19 नवंबर के फैसले में कहा, “जिला मजिस्ट्रेट ने नियम 32 के तहत किसी भी शर्तों के उल्लंघन के संबंध में कोई तथ्य नहीं दिया, जबकि लाइसेंस रद्द करने से पूर्व यह बताना आवश्यक है।”
अदालत ने बंदूक का लाइसेंस रद्द करने के आदेश को खारिज कर दिया।
भाषा सं राजेंद्र जितेंद्र
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