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Tuesday, 28 April, 2026
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गुजरातः गोधरा के बाद दंगों पर शीर्ष अदालत से नियुक्त एसआईटी की निगरानी वाले मामलों की स्थिति

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अहमदाबाद, 21 अप्रैल (भाषा) गोधरा कांड के बाद अहमदाबाद के नरोदा गाम में हुई हिंसा के मामले में गुजरात की विशेष अदालत द्वारा राज्य की पूर्व मंत्री माया कोडनानी समेत सभी 67 आरोपियों को बरी किये जाने के बाद अब ध्यान गुजरात दंगों के ऐसे अन्य मामलों की स्थिति पर है।

उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल ने गोधरा कांड के बाद नरोदा गाम मामले के अलावा 2002 में हुए सात अन्य दंगों के मामलों में जांच की है।

1- गुलबर्ग सोसाइटी मामला: फरवरी 2002 में अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसाइटी में हुई हिंसा में कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी समेत 69 लोग मारे गये थे। निचली अदालत ने फैसला सुनाया और मामले में 24 लोगों को सजा सुनाई जिनमें से 11 को उम्रकैद की सजा सुनाई गयी। मामला उच्च न्यायालय में लंबित है।

2- नरोदा पाटिया मामला: अहमदाबाद के नरोदा पाटिया में दंगों में 96 लोग मारे गये थे जिनमें अधिकतर एक अल्पसंख्यक समुदाय के थे। निचली अदालत ने गुजरात की पूर्व मंत्री माया कोडनानी और बजरंग दल के पूर्व नेता बाबू बजरंगी समेत 32 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। गुजरात उच्च न्यायालय ने बजरंगी समेत 16 लोगों को दोषी ठहराये जाने के फैसले को कायम रखा, लेकिन कोडनानी को बरी कर दिया।

3- सरदारपुरा मामला: गोधरा कांड के बाद मेहसाणा जिले के सरदारपुरा गांव में हुए दंगे में 13 लोग मारे गये। निचली अदालत ने 2011 में 31 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। उच्च न्यायालय ने 17 दोषियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा, वहीं 14 अन्य को बरी कर दिया।

4- ओडे मामला: आणंद जिले के ओडे गांव में 2002 में हुए दंगों में 23 लोग मारे गये थे। निचली अदालत ने 23 लोगों को दोषी ठहराया और उनमें से 14 को उम्रकैद की सजा सुनाई। गुजरात उच्च न्यायालय ने 2012 में 23 में से 19 को दोषी करार देने के फैसले को कायम रखा जिनमें 14 वो लोग भी थे जिन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गयी थी।

5- पंडरवाड़ा मामला: गोधरा कांड के बाद पंचमहल जिले के पंडरवाड़ा में हुई हिंसा में 39 लोगों की जान चली गयी। इनमें से 20 लोगों के शव की किसी ने पहचान नहीं की और उन्हें लूनावाड़ा कस्बे में पनाम नदी के पास दफना दिया गया। हालांकि, 2005 में इनमें से कुछ के रिश्तेदारों ने शव निकालने के लिए कब्र खुदवाईं। निचली अदालत ने पुलिस द्वारा गिरफ्तार 21 आरोपियों को बरी कर दिया। 14 अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला लंबित है जिन्हें बाद में गिरफ्तार किया गया।

6- प्रांतिज मामला: साबरकांठा जिले के प्रांतिज कस्बे के पास भीड़ ने एक गाड़ी में आग लगा दी जिसमें सवार तीन ब्रिटिश नागरिक और उनके चालक की जलने से मौत हो गयी। वे सभी मूल रूप से भारत के थे, लेकिन ब्रिटेन में बस गये थे। जिले में हिम्मतनगर की अदालत ने 2015 में मामले में गिरफ्तार सभी छह आरोपियों को बरी कर दिया।

7- दीपड़ा दरवाजा मामला: 2002 के दंगों के दौरान मेहसाणा जिले के विसनगर शहर में दीपड़ा दरवाजा इलाके में ग्यारह लोग मारे गए थे। एक निचली अदालत ने 2015 में 22 अभियुक्तों को दोषी ठहराया था और उनमें से 21 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। एसआईटी ने 61 अन्य को बरी किए जाने के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की थी। मामला उच्च न्यायालय में लंबित है।

8- नरोदा गाम मामला: अहमदाबाद के नरोदा गाम में 28 फरवरी, 2002 को हुए दंगों में 11 लोग मारे गये थे। निचली अदालत ने 20 अप्रैल, 2023 को मामले में पूर्व मंत्री कोडनानी और बजरंगी समेत सभी 67 आरोपियों को घटना के 21 साल बाद बरी कर दिया।

गुजरात के गोधरा में 27 फरवरी, 2002 को साबरमती एक्सप्रेस में आग लगा दी गयी थी जिसमें अयोध्या से लौट रहे 59 कारसेवकों की जलने से मृत्यु हो गयी। यह शीर्ष अदालत द्वारा नियुक्त एसआईटी की निगरानी वाला नौवां मामला था।

भाषा वैभव पवनेश

पवनेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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