नई दिल्ली: हरियाणा पुलिस एक पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की संभावना पर विचार कर रही है, जो प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस (POCSO) एक्ट के एक मामले में भारतीय शूटिंग टीम के कोच अंकुश भारद्वाज के खिलाफ है. उनके एक छात्रा ने उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है.
यह जानकारी सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में उनकी अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान दी गई, जो जस्टिस जे.बी. पारदीवाला की बेंच के सामने हो रही थी. अतिरिक्त एडवोकेट जनरल आलोक सांगवान ने कहा कि पुलिस आरोपी, शिकायतकर्ता या दोनों का पॉलीग्राफ टेस्ट कराने पर विचार कर रही है, यह जांच में अब तक मिले सबूतों की प्रकृति पर निर्भर करेगा.
हालांकि अदालत ने तुरंत भारद्वाज को औपचारिक अग्रिम जमानत नहीं दी, लेकिन अंतरिम रूप से उन्हें अगली सुनवाई 15 मई तक गिरफ्तारी से सुरक्षा दे दी.
मामले के तथ्यों और आरोपी व शिकायतकर्ता के बीच कुछ व्हाट्सएप चैट देखने के बाद अदालत ने भारद्वाज को पुलिस जांच में सहयोग करने के लिए कहा.
बेंच ने सांगवान से जांच के दस्तावेज देखने और कोर्ट की मदद के लिए एक छोटा नोट देने को भी कहा. साथ ही जांच अधिकारी को अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया.
भारद्वाज ने 17 मार्च के पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ अपील की है जिसमें उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी. उन्होंने कहा कि यह फैसला बिना ठीक से तथ्यों, सबूतों और जमानत से जुड़े कानूनी सिद्धांतों पर विचार किए बिना लिया गया था.
भारद्वाज ने आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि उनके और शिकायतकर्ता के परिवार के बीच बकाया कोचिंग फीस को लेकर विवाद था. उन्होंने अपने और शिकायतकर्ता के बीच हुई व्हाट्सएप चैट का भी हवाला दिया है.
आरोप
शिकायतकर्ता, जो एक राष्ट्रीय स्तर की शूटर है, ने आरोप लगाया कि भारद्वाज ने 16 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली के करणी सिंह शूटिंग रेंज में एक प्रतियोगिता के बाद उसके वहां से निकलते समय व्हाट्सएप पर उसे कॉल किया.
उसने आरोप लगाया कि कोच ने उसे सूरजकुंड के ताज होटल में परफॉर्मेंस एनालिसिस और नोट्स बनाने के लिए बुलाया. आरोपों के अनुसार, कोच लड़की को तीसरी मंजिल के एक कमरे में ले गया, जहां उसने कथित अपराध किया. उसने यह भी धमकी दी कि अगर उसने किसी को बताया तो वह उसके करियर को खराब कर देगा.
भारद्वाज ने उसे व्हाट्सएप पर शूटिंग ट्रेनिंग से जुड़े संदेश भेजना जारी रखा. जब लड़की ने उससे दूरी बनानी शुरू की तो उसने उसके माता-पिता से शिकायत की कि वह उसकी बात नहीं मान रही है.
मां द्वारा बार-बार डांटे जाने के बाद लड़की ने लगभग एक महीने बाद यह घटना अपनी मां को बताई. इसके बाद परिवार ने हरियाणा पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई.
भारद्वाज कॉमनवेल्थ यूथ गेम्स के गोल्ड मेडलिस्ट हैं और उन्होंने जर्मनी, चेक रिपब्लिक, हंगरी और अन्य देशों में कई अंतरराष्ट्रीय शूटिंग प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया है.
सुप्रीम कोर्ट में अपनी अपील में कोच ने कहा कि उन्हें झूठे आरोपों में फंसाया गया है ताकि निजी रंजिश निकाली जा सके और बकाया कोचिंग फीस माफ करवाई जा सके.
उन्होंने कहा, “इस गंभीर प्रकृति के मामले में याचिकाकर्ता को फंसाए जाने से उसकी प्रतिष्ठा, पेशेवर छवि और सामाजिक सम्मान को अपूरणीय नुकसान हुआ है, जो अंततः निर्दोष पाए जाने पर भी ठीक नहीं किया जा सकता.”
याचिका के अनुसार, आरोपों का लंबित रहना अपने आप में सजा जैसा है, इसलिए सावधानी और संतुलित दृष्टिकोण जरूरी है. इसमें यह भी कहा गया कि शिकायत दर्ज करने में 21 दिन की देरी से आरोपों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठते हैं.
उन्होंने कहा कि घटना के बाद भी उनके और लड़की के बीच व्हाट्सएप बातचीत सामान्य थी. उनके अनुसार, वह उन्हें तस्वीरें भेजती रही और उनके पोस्ट को लाइक भी करती रही. याचिका में कहा गया कि ये तथ्य अभियोजन के दावे से मेल नहीं खाते.
बकाया फीस के मुद्दे पर याचिका में कहा गया कि यह लाखों रुपये में थी और आरोप लगाया गया कि FIR इसलिए दर्ज की गई ताकि भारद्वाज पर दबाव बनाया जा सके कि वह अपना वैध पैसा छोड़ दें. इसमें कहा गया कि आरोपी की लगातार हिरासत और मुकदमे में देरी उनके संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निष्पक्ष और त्वरित सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन है.
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