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Sunday, 1 March, 2026
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गुजरात उच्च न्यायालय ने छेड़छाड़ के आरोपी को जमानत देने से इनकार किया

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अहमदाबाद, पांच जनवरी (भाषा) गुजरात उच्च न्यायालय ने नाबालिग लड़की से छेड़छाड़ के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा है कि दुष्कर्म और छेड़छाड़ भारतीय समाज का एक ‘स्याह सच’ है।

न्यायमूर्ति समीर दवे ने पिछले महीने पारित आदेश में मनुस्मृति और पद्म पुराण के श्लोकों का हवाला देते हुए व्यक्ति के जीवन में माता-पिता के महत्व को रेखांकित किया।

न्यायमूर्ति दवे ने 16 दिसंबर के अपने आदेश में कहा, ‘‘दुष्कर्म और छेड़छाड़ भारतीय समाज की स्याह सच्चाइयों में से एक है जो महिला की आत्मा को झकझोरता है और कुछ के लिए जीने की उम्मीद तक खत्म कर देता है। यह महिला या लड़की को अंदर तक हिला देता है जो कभी एक खुशहाल हस्ती होती थी।’’

इस फैसले की प्रति चार जनवरी को उपलब्ध हुई।

अदालत ने यह टिप्पणी छेड़छाड़ के एक मामले में आरोपी की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए की।

जानकारी के मुताबिक देवभूमि द्वारका जिले की एक महिला ने जनवरी 2022 में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके पति ने ही उसकी 12 साल की बेटी के साथ दो बार छेड़छाड़ की है। महिला की शिकायत पर वादीनार मुख्य पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।

भाषा धीरज देवेंद्र

देवेंद्र

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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