scorecardresearch
Sunday, 29 March, 2026
होमदेशगुजरात का शिक्षण संस्थान 250 छात्रों का खाना बनाने के लिए बायोगैस का कर रहा इस्तेमाल : अधिकारी

गुजरात का शिक्षण संस्थान 250 छात्रों का खाना बनाने के लिए बायोगैस का कर रहा इस्तेमाल : अधिकारी

Text Size:

अहमदाबाद, 28 मार्च (भाषा) गुजरात में स्थित एक शिक्षण संस्थान राज्य की संस्थागत बायोगैस संयंत्र योजना के तहत बायोगैस का उपयोग करके प्रतिदिन करीब 250 छात्रों के लिए भोजन तैयार करता है, जिससे इसकी एलपीजी सिलेंडर पर निर्भरता समाप्त हो गई है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।

एक आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक गांधीनगर स्थित श्रीमती मानेकबा विनय विहार शैक्षणिक परिसर में लगभग 250 छात्रों के लिए प्रतिदिन दो बार भोजन पकाया जाता है, जबकि परिसर में रहने वाले लगभग 15 परिवार भी खाना पकाने के लिए इस ईंधन का उपयोग करते हैं।

इसमें कहा गया है कि परिसर में 45 घन मीटर क्षमता वाले दो बायोगैस संयंत्र संचालित हैं, जिनकी कुल क्षमता 90 घन मीटर प्रति दिन है।

अधिकारियों ने बताया कि इन संयंत्रों के बिना संस्थान को प्रति माह लगभग 30 एलपीजी सिलेंडरों की आवश्यकता होती, लेकिन वर्तमान में उसे किसी की भी आवश्यकता नहीं है।

संस्था के प्रबंधक राहुल पटेल ने बताया कि सरकारी योजना से यह संस्थान खाना पकाने की गैस के मामले में आत्मनिर्भर हो गया है।

उन्होंने कहा कि करीब 220 गायों की वजह से बायोगैस उत्पादन के लिए पर्याप्त गोबर है, और उत्पन्न होने वाले घोल का उपयोग उर्वरक के रूप में किया जाता है, जिससे पूरी तरह से जैविक खेती संभव हो पाती है।

यह योजना गुजरात ऊर्जा विकास एजेंसी द्वारा संस्थानों को 25, 35, 45, 60 और 85 घन मीटर की क्षमता वाले बायोगैस संयंत्रों के लिए प्रदान की जाती है।

अधिकारियों ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में, गुजरात भर में 13,955 घन मीटर प्रति दिन की संयुक्त क्षमता वाले 193 ऐसे संयंत्र स्थापित किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि राज्य ने 2026-27 के लिए इस योजना के तहत 12 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं और लगभग 60 और बायोगैस संयंत्र स्थापित करने की योजना बना रहा है।

भाषा धीरज नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments