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Wednesday, 29 April, 2026
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लखनऊ पुलिस ने जीएसटी धोखाधड़ी गिरोह का किया भंडाफोड़

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लखनऊ, 22 अप्रैल (भाषा) लखनऊ पुलिस ने लोगों को ‘मुद्रा योजना’ के तहत कर्ज दिलाने के नाम पर उनके दस्तावेजों के जरिये मुखौटा कंपनिया बनाकर सवा करोड़ रुपये से ज्यादा की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) धोखाधड़ी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करके उसके एक सदस्य को गिरफ्तार किया है।

अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने इस मामले में लखीमपुर खीरी के रहने वाले रविंद्र गिरि (35) को गिरफ्तार किया है।

उन्होंने बताया कि गिरि एक ऐसे संगठित गिरोह का सदस्य है जिसने लोगों को मुद्रा योजना के तहत कर्ज दिलाने के बहाने उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेजों का इस्तेमाल करके सिम कार्ड हासिल किये और फिर मुखौटा कंपनियां बनाईं।

अधिकारियों ने बताया कि गिरोह इन मुखौटा कंपनियों के आधार पर जीएसटी (माल एवं सेवा कर) के प्रावधनों के तहत करीब 1.30 करोड़ की इनपुट टैक्स क्रेडिट धोखाधड़ी को अंजाम दिया।

अधिकारियों के मुताबिक जालसाजों ने मुखौटा कंपनियां पंजीकृत करवाने के बाद इनका इस्तेमाल नकली इनवॉइस और ई-वे बिल बनाने के लिए किया ताकि काल्पनिक लेन-देन को असली दिखाया जा सके और आईटीसी प्राप्त किया जा सके। उन्होंने बताया कि गिरोह की इस जालसाजी से सरकार को राजस्व के मद में भारी नुकसान हुआ।

सहायक पुलिस उपायुक्त (अपराध शाखा) किरण यादव ने बताया कि यह मामला रहीमाबाद थाने में एक राज्य कर अधिकारी की शिकायत पर दर्ज किया गया था। उन्होंने बताया कि शिकायत में एक ऐसी कंपनी का जिक्र था जिसका कोई अस्तित्व ही नहीं था लेकिन वह गलत तरीके से आईटीसी का दावा कर रही थी।

यादव ने कहा, ‘‘पकड़े गये आरोपी ने पूछताछ के दौरान खुलासा किया कि वह लोगों से मुद्रा योजना के तहत कर्ज दिलाने के बहाने उनके दस्तावेज़ इकट्ठा करता था। उसके बाद वह उन जानकारियों का इस्तेमाल करके सिम कार्ड हासिल करता था और फिर धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए मुखौटा कंपनी पंजीकृत कराता था।’’

यादव ने बताया कि आरोपी ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया है। उन्होंने बताया कि इस गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करने के लिए आगे की जांच जारी है।

उन्होंने कहा, ‘‘ज़रूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है और इस मामले में और भी गिरफ्तारियां होने की संभावना है।’’

भाषा सलीम धीरज

धीरज

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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