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Thursday, 30 July, 2026
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पैलेट गन के इस्तेमाल पर पूरी रोक की मांग, SC ने कहा—असाधारण हालात में ‘जरूरत के हिसाब से कार्रवाई’ जरूरी

तीन जजों की बेंच ने कहा कि याचिका में उन नियमों को चुनौती नहीं दी गई है, जो असाधारण हालात में धातु की पैलेट के इस्तेमाल की इजाजत देते हैं. ऐसा नहीं होने पर कोर्ट इन्हें पूरी तरह बैन करने की मांग पर विचार नहीं कर सकता.

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नई दिल्ली: भीड़ को काबू करने के लिए धातु की पैलेट के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग वाली पूर्व इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) प्रमुख यशोवर्धन आजाद की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सवाल किया कि क्या ऐसी पूरी तरह की रोक लगाई जा सकती है.

आजाद की याचिका पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने सुनवाई की. बेंच ने कहा कि असाधारण हालात में पैलेट गन का इस्तेमाल पुलिस की जरूरत के हिसाब से की जाने वाली कार्रवाई का हिस्सा है.

इसके अलावा, बेंच ने कहा कि आजाद ने उन नियमों को चुनौती नहीं दी है, जो असाधारण हालात में ऐसी पैलेट के इस्तेमाल की इजाजत देते हैं. ऐसा नहीं होने पर कोर्ट पैलेट के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने की उनकी मांग पर विचार नहीं कर सकता.

जब वकील वृंदा ग्रोवर ने बताया कि इस बारे में कोई नियम सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं, तो बेंच ने केंद्र की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल को प्रदर्शन के दौरान भीड़ को काबू करने के तरीकों से जुड़े दिशा-निर्देश रिकॉर्ड में रखने का निर्देश दिया.

हालांकि, तब तक बेंच ने कहा कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर तैनात रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के पास मौजूद गोला-बारूद का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए.

साहिल लोचब, मामले में सह-याचिकाकर्ताओं में से एक | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट
साहिल लोचब, मामले में सह-याचिकाकर्ताओं में से एक | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट

आजाद ने 20 जुलाई को नई दिल्ली में 2026 नीट पेपर लीक को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से आयोजित चलो संसद प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की ज्यादती को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.

आजाद ने खास तौर पर पैलेट के इस्तेमाल का मुद्दा उठाया है. पैलेट की वजह से घायल हुए दो प्रदर्शनकारी इस मामले में सह-याचिकाकर्ता हैं.

गुरुवार को सुनवाई के दौरान बेंच की सदस्य जस्टिस जॉयमाला बागची ने पूछा कि अगर बहुत गंभीर हालात में पुलिस को पैलेट इस्तेमाल करने की इजाजत है, तो पुलिस को इनके इस्तेमाल से कैसे रोका जा सकता है? उन्होंने कहा कि जब लाठीचार्ज और आंसू गैस से हिंसा काबू में नहीं आती या कोई आंदोलन कुछ गलत इरादे वाले लोगों के कब्जे में चला जाता है, तब क्या होगा?

इस पर ग्रोवर ने साफ किया कि उनकी याचिका सिर्फ धातु की पैलेट तक सीमित है. इस पर जस्टिस बागची ने फिर कहा कि कोर्ट उनकी दलील पर विचार करने से पीछे नहीं हट रहा है. लेकिन इसके लिए उन्हें यह दिखाना होगा कि भीड़ को काबू करने या हटाने के लिए अलग-अलग स्तरों पर कार्रवाई से जुड़े ऐसे नियम हैं, जिनमें पैलेट के इस्तेमाल की इजाजत दी गई है.

जज ने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण और सही तरीके से किया जा रहा प्रदर्शन किसी भी समय असामाजिक तत्वों के शामिल होने के कारण हिंसक हो सकता है और ऐसे समय में कानून लागू करने वाली एजेंसियों की ओर से “जरूरत के हिसाब से अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई” कभी-कभी जरूरी हो सकती है.

इस पर ग्रोवर ने याचिका में बदलाव करने पर सहमति जताई. बाद में, उनके अनुरोध पर बेंच ने दिल्ली सरकार को पैलेट की वजह से घायल हुए दोनों सह-याचिकाकर्ताओं को उचित इलाज देने का निर्देश दिया. दोनों को लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है और उनके शरीर से पैलेट निकालने के लिए सर्जरी की गई है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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