नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस ने राष्ट्रीय शिक्षा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की 11वीं कक्षा की राजनीतिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक से स्वतंत्रता सेनानी मौलाना अबुल कलाम आजाद के उल्लेख हटाए जाने को लेकर बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि सरकार इतिहास को विकृत करने की साजिश रच रही है।
पार्टी प्रवक्ता अंशुल अविजित ने यह दावा भी किया कि इस सरकार में स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को पुस्तकों से मिटाने का प्रयास हो रहा है।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मौलाना अबुल कलाम आजाद का उल्लेख 11वीं कक्षा की एनसीईआरटी की किताब से हटाया गया है। मौलाना आजाद देश के पहले शिक्षा मंत्री थे। आजादी की लड़ाई में उनका महत्वपूर्ण योगदान था। वह अपने अखबार के माध्यम से सामाजिक न्याय और हिंदू-मुस्लिम एकता की बात करते थे। वह स्वदेशी और स्वराज की वकालत करते थे।’’
अविजित ने दावा किया, ‘‘मोदी सरकार इतिहास को खोखला करती जा रही है। वह झूठ के आधार पर इबारत खड़ी करनी चाहती है। ये साजिश वो लोग कर रहे हैं जिनके वैचारिक पूर्वजों का आजादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं था। इन्होंने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ का विरोध किया था, तिरंगे का विरोध किया था। ’’
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने आरोप लगाया कि सरकार इतिहास के पुनर्लेखन और राष्ट्रीय स्वयंसेवक को मजबूत करने के लिए फर्जी विमर्श गढ़ने का प्रयास कर रही है।
माकपा नेता सीताराम येचुरी ने ट्वीट कर कहा ” स्कूली पाठ्यपुस्तकों से मौलाना आजाद के किसी भी संदर्भ को हटाना अपमानजनक है। आरएसएस की फासीवादी वैचारिक योजना को आगे बढ़ाने के लिए झूठा विमर्श तैयार कर इतिहास का ऐसा प्रतिशोधपूर्ण पुनर्लेखन आधुनिक भारत की नींव को नष्ट करेगा।”
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय शिक्षा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की 11वीं कक्षा की राजनीतिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक से स्वतंत्रता सेनानी एवं देश के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद के उल्लेख को हटा दिया गया है।
पिछले वर्ष पाठ्यक्रम को युक्तिसंगत बनाने और कुछ अंशों के अप्रसांगिक होने के आधार पर एनसीईआरटी ने गुजरात दंगों, मुगल दरबार, आपातकाल, शीत युद्ध, नक्सल आंदोलन आदि के कुछ अंशों को पाठ्यपुस्तक से हटा दिया था।
भाषा हक हक पवनेश
पवनेश
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