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Sunday, 8 February, 2026
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गांधी स्मारक निधि ने कांग्रेस, भाजपा के बीच जंग में राष्ट्रपिता के चित्र के दुरुपयोग की निंदा की

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बेंगलुरु, आठ फरवरी (भाषा) कर्नाटक गांधी स्मारक निधि (केजीएसएन) ने कर्नाटक में हाल ही में प्रकाशित एक विज्ञापन में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के चित्र के कथित दुरुपयोग की निंदा की है। संस्था ने इसे राष्ट्रपिता के मूल आदर्शों का अपमान और गंभीर राष्ट्रीय चिंता का विषय करार दिया है।

तीन फरवरी को कर्नाटक के प्रमुख कन्नड़ और अंग्रेजी अखबारों के पहले पन्ने पर प्रकाशित कांग्रेस सरकार के विज्ञापन में महात्मा गांधी को सफेद कमीज और खाकी पैंट पहने ‘संघ-अप्पा’ को मनरेगा को खत्म करने के लिए फटकार लगाते हुए दिखाया गया था।

यह विज्ञापन महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण)’ (वीबी-जी राम जी) लाने के लिए केंद्र सरकार पर कटाक्ष करता था।

जवाब में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सात फरवरी को पूरे पन्ने का विज्ञापन छपवाया, जिसमें महात्मा गांधी को कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को मारने के लिए अपनी छड़ी उठाते दिखाया गया था।

इस विज्ञापन में राष्ट्रपिता को तीनों नेताओं से यह कहते हुए दिखाया गया था, “तुम तीन ‘नुंगप्पा’ (सब कुछ गंवा देने वाला) के लिए, जो महात्मा गांधी को अपनी संपत्ति की तरह इस्तेमाल कर रहे हो।” वहीं, सिद्धरमैया, राहुल और खरगे को राष्ट्रपिता से उन्हें न मारने की गुहार लगाते दिखाया गया था।

केजीएसएन के अध्यक्ष वुडे पी कृष्णा और मानद सचिव एमसी नरेंद्र ने एक बयान जारी कर दोनों विज्ञापनों में महात्मा गांधी के चित्रण पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह अपमानजनक और राष्ट्रपिता के दर्शन के विपरीत है।

बयान में चेतावनी दी गई है कि इस तरह का चित्रण युवा पीढ़ी को गुमराह कर सकता है और महात्मा गांधी की विरासत से जुड़ी गरिमा को नष्ट कर सकता है।

इसमें कहा गया है, “कर्नाटक के प्रमुख अखबारों में हाल ही में प्रकाशित विज्ञापन में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को इस तरह से चित्रित किया गया है कि उनके दर्शन को समझने वाला कोई भी व्यक्ति स्तब्ध रह जाएगा। राष्ट्रपिता को जिस तरह से दर्शाया गया है, वह पूरे देश के लिए शर्म की बात है और यह उनके मूल आदर्शों जैसे अहिंसा, सत्याग्रह एवं सर्वोदय के बिल्कुल विपरीत है।”

बयान के मुताबिक, यह चित्रण महात्मा गांधी के मूल्यों को नष्ट करने के समान है। इसमें राष्ट्रपिता के चित्र का राजनीतिक सुविधा के लिए इस्तेमाल किए जाने की प्रवृत्ति को हाल के समय में एक चिंताजनक घटनाक्रम बताया गया है।

बयान में कहा गया है, “ऐसे समय में जब दुनियाभर में केवल महात्मा गांधी को ‘महात्मा’ की उपाधि दी जाती है, यह चिंताजनक है कि हाल के दिनों में मीडिया के कुछ वर्ग गांधीजी का अपमानजनक तरीके से और राजनीतिक सुविधा के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।”

इसमें कहा गया है कि इस तरह के दुरुपयोग से “युवा पीढ़ी के बीच गलत संदेश” जाने का खतरा है।

केजीएसएन ने मीडिया से जिम्मेदाराना रुख अपनाने और अपने राष्ट्रीय कर्तव्य का पालन करने का आग्रह किया। संस्था ने संबंधित अखबारों के संपादकों से कहा कि वे जनहित में बयान प्रकाशित करें।

भाषा पारुल नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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