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Friday, 12 July, 2024
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‘गवाह’ से ‘संदिग्ध’: क्यों CBI ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के परिसरों पर छापा मारा

ऐसा पता चला है कि सीबीआई को संदेह है कि मलिक को जम्मू में 2,200 करोड़ रुपये के ठेके के लिए रिश्वत से फायदा हुआ. 2021 में, उन्होंने कहा कि उन्होंने 300 करोड़ रुपये की रिश्वत लेन से इनकार कर दिया है, जिससे जांच शुरू हो गई है.

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नई दिल्ली: दिप्रिंट को मिली जानकारी के मुताबिक जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के खिलाफ जम्मू के किश्तवाड़ जिले में एक जलविद्युत परियोजना के संबंध में सीबीआई द्वारा जांच की जा रही है. यह जांच सिविल कार्य के लिए 2,200 करोड़ रुपये का ठेका देने के दौरान प्राप्त रिश्वत से कथित तौर पर फायदा उठाने के संबंध में की जा रही है.

मलिक ने अक्टूबर 2021 में कहा था कि जब वह 23 अगस्त 2018 से 30 अक्टूबर 2019 तक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल थे तो उन्हें दो फाइलों को मंजूरी देने के लिए 300 करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश की गई थी. उनमें से एक कीरू जलविद्युत परियोजना में 2,200 करोड़ रुपये के सिविल कार्य के लिए थी. अप्रैल 2022 में, सीबीआई ने मामले में चिनाब वैली पावर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (सीवीपीपीपीएल) के अधिकारियों सहित अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया.

एक सूत्र ने बताया कि मलिक, जिसने अब तक मामले में गवाह होने का दावा किया है, सीबीआई जांच के दौरान उनकी कथित संलिप्तता सामने आने के बाद वह संदिग्ध हो गए. सीबीआई ने मलिक को कभी गवाह नहीं बुलाया लेकिन “स्पष्टीकरण” के लिए पहले उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया था.

एक सूत्र ने कहा, “वह मामले में गवाह या मुखबिर होने का दावा कर रहे हैं. लेकिन, हमारी जांच के दौरान, हमने उन्हें रिश्वत के लाभार्थियों से जुड़ा हुआ पाया. अब इस बात का संदेह हैं कि उन्हें भी फायदा पहुंचा है और हम इसकी जांच कर रहे हैं.”

सूत्र ने कहा, सीबीआई ने पाया कि निविदा के दौरान उचित प्रक्रिया की कमी थी और वर्तमान में सभी ज़ब्त दस्तावेजों की जांच कर रही है.

सूत्र ने कहा, “सबसे पहले, इसे अनुचित समझे जाने के बाद बोर्ड बैठक में निविदा रद्द कर दी गई थी. फिर, अचानक, इसे रिवाइव करके अगली बैठक में पटेल इंजीनियरिंग को सौंप दिया गया.”

दिप्रिंट ने मलिक से टेलीफोन पर संपर्क करने की कोशिश की. हालांकि, उनके फोन पर कॉल रिसीव करने वाले उनके दोस्त ने कहा, “वह भर्ती हैं और अभी बात करने की स्थिति में नहीं हैं और बाद में ही उपलब्ध हो पाएंगे.” मलिक का जवाब आने के बाद यह रिपोर्ट अपडेट की जाएगी.

गुरुवार को, सीबीआई ने 30 स्थानों की तलाशी ली, जिसमें दिल्ली, हरियाणा के गुरुग्राम और उत्तर प्रदेश के बागपत में मलिक के तीन परिसर शामिल थे. सीबीआई प्रवक्ता ने कहा कि छापे में विभिन्न शहरों में नकदी जमा और एफडी व कई संपत्तियों में निवेश के डिजिटल और डॉक्युमेंट्री सबूत मिले.

हालांकि, मलिक ने कहा कि एजेंसी उन्हें निशाना बना रही है क्योंकि वह खुले तौर पर सरकार के आलोचक रहे हैं.

मलिक के दावों में जो दूसरी फ़ाइल सामने आई थी वह सरकारी कर्मचारियों के लिए एक समूह चिकित्सा बीमा योजना थी. सीबीआई ने उस मामले में अनिल अंबानी की रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी और ट्रिनिटी रीइंश्योरेंस ब्रोकर्स पर मामला दर्ज किया था.

मलिक ने 2021 में कहा था, “कश्मीर जाने के बाद, दो फाइलें मेरे पास आईं (क्लीयरेंस के लिए) – एक अंबानी की थी, और दूसरी आरएसएस से जुड़े एक व्यक्ति की थी, जो पिछली महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली पीडीपी-बीजेपी गठबंधन सरकार में मंत्री थे, जो पीएम मोदी के बहुत करीबी होने का दावा करते थे. मुझे दोनों विभागों के सचिवों ने सूचित किया कि इसमें एक घोटाला है और मैंने तदनुसार दोनों सौदे रद्द कर दिए.”

अक्टूबर 2021 में राजस्थान के झुंझुनू में एक कार्यक्रम में एक सभा के दौरान, मलिक ने आगे कहा, “सचिवों ने मुझसे कहा, ‘आपको फाइलें निपटाने के लिए प्रत्येक के लिए 150 करोड़ रुपये मिलेंगे,’ लेकिन मैंने उन्हें बताया कि मैं पांच कुर्ता-पायजामा लेकर आया हूं. और उसे ही लेकर चला जाऊंगा.”

दो एफआईआर

सीबीआई की एफआईआर के मुताबिक, जल विद्युत परियोजना का ठेका देने में ई-टेंडरिंग दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया. इसकी जांच में पाया गया कि पटेल इंजीनियरिंग को अनुचित तरीकों से ठेका मिला और इसमें रिश्वत दी गई.

एफआईआर में नामित आरोपियों में तत्कालीन सीवीपीपीपीएल अध्यक्ष आईएएस अधिकारी नवीन कुमार चौधरी; तत्कालीन सीवीपीपीपीएल प्रबंध निदेशक एमएस बाबू; तत्कालीन सीवीपीपीपीएल निदेशक एम.के. मित्तल और अरुण कुमार मिश्रा; पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड; और अन्य अज्ञात.

एफआईआर, जिसे दिप्रिंट ने एक्सेस किया था, में कहा गया है कि 47वीं सीवीपीपीपीएल बोर्ड की बैठक में मौजूदा टेंडरिंग को रद्द करने के बाद रिवर्स नीलामी के साथ दोबारा टेंडर करने का फैसला किया गया. लेकिन ऐसा नहीं हुआ और 48वीं बैठक में लिए गए फैसले के मुताबिक पटेल इंजीनियरिंग को यह ठेका मिल गया.

सूत्र ने दिप्रिंट को बताया कि कथित तौर पर कंपनी को दूसरों के मुकाबले तरजीह दी गई और उसने ‘आर्थिक लाभ’ के बदले नियमों का उल्लंघन कर एक अनुबंध हासिल किया.

चिकित्सा बीमा योजना में अन्य एफआईआर के अनुसार, जम्मू-कश्मीर सरकार के वित्त विभाग में अज्ञात अधिकारियों ने ट्रिनिटी रीइंश्योरेंस ब्रोकर्स, रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी और अन्य अज्ञात लोक सेवकों और निजी व्यक्तियों के साथ साजिश और मिलीभगत में अपने पद का दुरुपयोग किया.

एफआईआर में कहा गया है कि उन्होंने 2017 और 2018 में “खुद को आर्थिक लाभ और राज्य के खजाने को गलत तरीके से नुकसान पहुंचाया” और “जम्मू-कश्मीर सरकार के साथ बेईमानी की”

(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)


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