गुरुग्राम: कई सालों से हरियाणा के मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली बैठकों में लिए गए हर तरह के फैसले कागज पर अक्सर एक ही तरह खत्म होते थे—कोई अधिकारी लिख देता था, “आवश्यक कार्रवाई करें”, या “शीघ्र कार्रवाई करें”, या फिर सिर्फ “देख लें”.
फाइल आगे बढ़ जाती थी, लेकिन यह साफ नहीं होता था कि क्या काम किसे करना है और कब तक करना है.
अब इस तरह की प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई है.
हरियाणा सरकार के मानव संसाधन विभाग ने एक आठ पन्नों की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है. इसमें कहा गया है कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में लिए गए हर फैसले को एक स्पष्ट “एक्शन पॉइंट” में बांटना होगा.
हर एक्शन पॉइंट में पांच सवालों का जवाब होना चाहिए: क्या काम करना है, कौन करेगा, किसकी मदद से करेगा, किस तारीख तक करना है और इसका क्या नतीजा होना चाहिए.
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की ओर से मंगलवार को जारी यह आदेश हरियाणा के सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, राज्य बोर्ड और निगमों के प्रबंध निदेशकों, मंडल आयुक्तों, उपायुक्तों, उपमंडल अधिकारियों और विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रारों को भेजा गया है.
SOP तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है. यह मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली सभी भविष्य की बैठकों पर लागू होगी. साथ ही, जहां तक संभव हो, पहले हो चुकी बैठकों के लंबित एक्शन पॉइंट पर भी इसे लागू किया जाएगा. आदेश में चेतावनी दी गई है कि किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी या निर्देशों की अनदेखी को गंभीरता से लिया जाएगा.
हरियाणा सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को दिप्रिंट को बताया कि यह आदेश सरकार के अपने स्तर पर देखे गए एक तरीके के बाद लाया गया है. बैठकों के मिनट्स एक समान तरीके से तैयार नहीं किए जा रहे थे, फैसलों को स्पष्ट और ट्रैक किए जा सकने वाले एक्शन पॉइंट में नहीं बदला जा रहा था और कार्रवाई की रिपोर्ट देने का भी कोई एक समान तरीका नहीं था.
एक्शन बैठक से पहले ही शुरू होगा
नए नियमों का पालन उस समय से ही शुरू हो जाएगा, जब अधिकारी मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली बैठक के कमरे में पहुंचने से पहले तैयारी कर रहे होंगे. अब विभागों को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली किसी भी बैठक से कम से कम तीन कामकाजी दिन पहले एजेंडा और बैठक से जुड़ी पृष्ठभूमि की जानकारी (बैकग्राउंड नोट) भेजनी होगी.
एजेंडे में केवल उन्हीं विषयों को शामिल किया जा सकेगा, जिन पर वास्तव में किसी फैसले या समीक्षा की जरूरत है.
एजेंडे के हर विषय में संक्षेप में सात बातें बतानी होंगी: मौजूदा स्थिति, उस विषय पर पहले लिए गए फैसले, अब तक की गई कार्रवाई, उपलब्धियां और समस्याएं, वित्तीय या प्रशासनिक स्थिति, किस फैसले की ज़रूरत है और प्रस्तावित समयसीमा.
मिनट्स सिर्फ बैठक का सार नहीं होंगे
बैठक खत्म होने के बाद उसके मिनट्स में केवल यह नहीं लिखा जा सकता कि बैठक में क्या चर्चा हुई. SOP इस बारे में साफ है—मिनट्स “फैसले और कार्रवाई पर आधारित” होने चाहिए, न कि बातचीत का सामान्य विवरण.
मिनट्स में दर्ज हर एक्शन पॉइंट इतना साफ लिखा होना चाहिए कि बाद में उसकी कार्रवाई को निष्पक्ष तरीके से मापा जा सके. इसके अलावा, “आवश्यक कार्रवाई करें”, “शीघ्र कार्रवाई करें”, “देख लें” जैसे अस्पष्ट और हर जगह इस्तेमाल किए जा सकने वाले वाक्यों से “जहां तक संभव हो” बचना होगा.
बैठक के तीन वर्किंग डेज़ के अंदर ही मिनट्स का ड्राफ्ट तैयार करना होगा. जिस विभाग ने बैठक का समन्वय किया है, वह पहला ड्राफ्ट तैयार करने के लिए जिम्मेदार होगा. अगर बैठक में कई विभाग शामिल थे, तो एक प्रमुख विभाग अंतिम और मंजूर किए गए एडिशन के लिए जिम्मेदार होगा. मंजूरी मिलने के बाद मिनट्स में बदलाव नहीं किया जा सकेगा. किसी तथ्य में सुधार करना हो तो सक्षम अधिकारी की मंजूरी से अलग से शुद्धि-पत्र जारी करना होगा.
कागज़ी रिकॉर्ड: एक्शन टेकन रिपोर्ट
हर एक्शन पॉइंट के लिए विभागों को एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) देनी होगी. SOP में इसे “सबूत पर आधारित अनुपालन रिपोर्ट” बताया गया है, न कि सिर्फ औपचारिक रिपोर्ट.
हर रिपोर्ट में एक्शन पॉइंट की स्थिति इनमें से किसी एक के रूप में बतानी होगी: पूरा हो गया (Completed), काम चल रहा है (In Progress), समयसीमा बीत गई (Overdue), काम शुरू नहीं हुआ (Not Started), या संभव नहीं/फैसले की जरूरत (Not Feasible/Issue Requiring Decision). अगर कोई विभाग किसी काम को पूरा हुआ बताता है, तो उसे अपने दावे के पीछे आदेश, अधिसूचना, मंजूरी, प्रगति रिपोर्ट, फोटो, पोर्टल रिपोर्ट या आंकड़े दिखाने होंगे.
अब सिर्फ “कार्रवाई की जा रही है” लिखकर काम नहीं चलेगा. SOP में कहा गया है कि अगर कोई काम अभी लंबित है तो की गई सटीक कार्रवाई, देरी की वजह और काम पूरा करने की नई तारीख बतानी होगी. मिनट्स भेजे जाने के एक महीने के अंदर पहली ATR देनी होगी. अगर उसके बाद भी कोई एक्शन पॉइंट खुला रहता है, तो उसे पूरा होने तक हर अगले महीने के पहले हफ्ते में अपडेटेड रिपोर्ट देनी होगी.
काम नहीं होने पर मामला ऊपर भेजा जाएगा
जिन एक्शन पॉइंट की समयसीमा बार-बार निकल रही है, उन्हें बिना किसी फॉलो-अप के सिर्फ फाइल में पड़ा नहीं रहने दिया जाएगा.
SOP के तहत प्रशासनिक सचिव या विभागाध्यक्ष को देरी की वजह की समीक्षा करनी होगी.
अगर देरी किसी दूसरे विभाग की वजह से है, तो रिपोर्ट में यह बात साफ-साफ बतानी होगी. अगर किसी एक्शन पॉइंट में बार-बार देरी होती है, तो मामला मुख्य सचिव तक भेजा जा सकता है.
मुख्यमंत्री बैठक निगरानी पोर्टल
सरकार ने निगरानी के लिए एक और व्यवस्था की है— मुख्यमंत्री बैठक निगरानी पोर्टल (CM Meeting Monitoring Portal). अब यह पोर्टल मुख्यमंत्री की इन बैठकों में लिए गए हर फैसले पर नजर रखने के लिए मुख्य ट्रैकर के रूप में काम करेगा.
मिनट्स को मंजूरी मिलने के बाद विभागों के पास संबंधित एक्शन पॉइंट पोर्टल पर अपलोड करने के लिए दो कामकाजी दिन होंगे. इसमें जिम्मेदार अधिकारी, समयसीमा, मौजूदा स्थिति, कार्रवाई का सबूत और देरी की वजह बतानी होगी.
हर विभाग को पोर्टल के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त करना होगा. यह अधिकारी पोर्टल पर दी गई जानकारी को सही और अपडेट रखने के लिए जिम्मेदार होगा.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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