नई दिल्ली: हाल ही में आई फिल्म हनुमान अंश के लिए “मैं तेरे ही भरोसे हनुमान” गाने वाले सुनील लोधी को बुंदेलखंड के अपने गांव में कई सालों तक अशुभ माना जाता था. हालात इतने खराब थे कि अगर गांव के लोग उन्हें सुबह देख लेते थे, तो अपना रास्ता बदल लेते थे.
दिप्रिंट से बातचीत में सुनील ने कहा कि नेत्रहीन होना कोई अपराध नहीं है, लेकिन लोग उन्हें ऐसे देखते थे जैसे वह काला जादू करते हों.
25 साल के सुनील ने कहा, “जब मैं सुबह घर से बाहर निकलता था, तो लोग मेरी तरफ नहीं देखते थे. कई बार मैंने उन्हें यह कहते सुना, ‘सुबह-सुबह हमने किसका चेहरा देख लिया?’”
उन्हें जरा भी अंदाज़ा नहीं था कि साल 2019 में उनके चाचा रोहित साहू द्वारा शुरू किया गया एक इंस्टाग्राम पेज उनकी ज़िंदगी की दिशा बदल देगा. ‘बुंदेली दुनिया’ नाम से शुरू किए गए इस पेज का मकसद बुंदेलखंड क्षेत्र की लोक कला को सामने लाना था. बुंदेलखंड उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में फैला हुआ है. एक दिन रोहित को अपनी बहन का फोन आया. उन्होंने रोहित को सुनील की गायकी के बारे में बताया.
रोहित ने तुरंत अपना फोन और ट्राइपॉड लिया और सुनील के गांव पहुंच गए. जब रोहित ने पहली बार सुनील को गाते हुए सुना, तो उन्हें लगा कि उनकी आवाज़ पर भगवान का आशीर्वाद है. उन्होंने सुनील का पहला वीडियो अपने घर की छत पर बनाया.
रोहित ने कहा, “कई महीनों तक कुछ नहीं बदला. वीडियो के व्यूज एक अंक में ही रहते थे. पूरा गांव मेरा मज़ाक उड़ाने लगा—‘एक बेरोजगार नेत्रहीन लड़के के पीछे अपना समय, पेट्रोल और मेहनत की कमाई क्यों बर्बाद कर रहे हो?’”
एक बहिष्कृत से सबके पसंदीदा
समय बीतने के साथ सुनील को त्योहारों के दौरान गाने के लिए आसपास के गांवों से बुलावा आने लगा. 2023 में उन्होंने “दूल्हा बनकर आ गव ठेला, है मोटर को ब्याव” गाना रिकॉर्ड किया, जिसे करीब 9 लाख व्यूज़ मिले. इसके बाद एकाएक चीज़ें बदलने लगीं और सुनील को स्थानीय कार्यक्रमों में गाने के लिए बुलावे आने लगे. करीब नौ महीने पहले उन्होंने “ओ मेरे संकट के कटैया हनुमान” नाम से एक और म्यूजिक वीडियो जारी किया, जिसे 3.3 करोड़ से ज्यादा व्यूज़ मिले थे.
इस साल फरवरी में रोहित और सुनील मुंबई में थे, जहां उन्हें प्रोड्यूसर गजेंद्र सक्सेना द्वारा चलाए जा रहे साईं बाबा स्टूडियो के लिए एक गाना रिकॉर्ड करना था. इस दौरान रोहित ने वर्सोवा बीच पर सुनील का एक वीडियो बनाया और उसे इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर दिया. ‘हनुमान अंश’ के डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी ने यह रील देखी और सुनील को पहला बड़ा मौका मिला.
सुनील ने याद करते हुए बताया कि उन्होंने अपना तंबूरा लेकर “मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई” गाना गाया. उन्होंने कहा, “मैंने चार लाइनें गाईं और पूरा कमरा शांत हो गया.” उन्हें याद है कि विशाल ने कहा था, “यही फिल्म की आवाज़ है.” हालांकि, सुनील को शक था कि यह गाना आखिर में फिल्म में शामिल होगा भी या नहीं.
उन्होंने कहा, “भैया, ये फिल्म इंडस्ट्री है. इनके पास बड़े-बड़े प्लेबैक सिंगर हैं. हमारी देहाती बुंदेलखंडी आवाज़ को आखिरकार फिल्म में कौन रखेगा? हमें लगा था कि वे इसे बदल देंगे.”
अब उनकी आवाज़ देशभर में लाखों लोगों तक पहुंच चुकी है. रोहित ने कहा, “जो लोग पहले उसके भविष्य पर सवाल उठाते थे, वही लोग आज हमारे दरवाजे के बाहर माला लेकर खड़े रहते हैं और उसके पैर छूने का इंतज़ार करते हैं.”
उनके चाचा ही उनकी आंखें हैं
सुनील जन्म से नेत्रहीन हैं. उनके पास अपनी औपचारिक पढ़ाई पूरी करने के साधन नहीं थे. उनका परिवार आज भी छोटे स्तर पर पशुपालन से अपना गुजारा करता है और बुंदेलखंड के आगरा गांव में उनके पास ज़मीन का एक छोटा टुकड़ा है.
छोटी उम्र से ही सुनील को चौपाल पर गाए जाने वाले लोक भजनों में रुचि होने लगी थी. चौपाल वह जगह होती है जहां गांव के लोग बैठक और कार्यक्रमों के लिए इकट्ठा होते हैं. “मोरे संकट के कटैया हनुमान” जैसे लोक भजन उन्हें पसंद थे. वह भजन मंडलियों के गांव आने का इंतज़ार करते थे. ये कलाकारों की ऐसी टोलियां होती हैं, जो गांव-गांव जाकर बुंदेली लोक भजन गाती हैं.
इन भजन मंडलियों के एक कलाकार सुनील से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उन्हें एक तंबूरा दे दिया. यह लंबे गले वाला एक तार वाला वाद्य यंत्र है.
रोहित ने कहा, “एक नेत्रहीन बच्चे को बिना एक भी ताल बिगाड़े लय बनाए रखते देखकर मंडली के एक बुजुर्ग गायक ने अपना तंबूरा उठाया, उसे सुनील के हाथों में रखा और कहा, ‘अब यह तुम्हारा है.’ वह सिर्फ एक वाद्य यंत्र नहीं था, बल्कि दुनिया में अपना गुज़ारा करने के लिए सुनील का सहारा बन गया.”
तब से सुनील लोक भजन गाते आ रहे हैं, लेकिन जब उन्हें नए गाने के बोल सीखने होते हैं, तो उनके चाचा उनकी मदद करते हैं.
सुनील ने कहा, “जब मेरे सामने किसी गाने की लिखी हुई स्क्रिप्ट रखी जाती है, तो मेरे चाचा मेरी आंखें बन जाते हैं. वह मेरे सामने बैठकर हर लाइन को एक-एक अक्षर और हिस्से में बांटकर समझाते हैं और उसे 20 बार दोहराते हैं, जब तक उसकी लय मेरे अंदर पूरी तरह बैठ नहीं जाती.”
हनुमान उनकी सांसों में
हाल ही में ट्रेन में सुनील के गाना गाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया गया. इसमें गलत दावा किया गया कि वह भीख मांगने के लिए लोकल ट्रेनों में गाना गाते थे. सुनील ने साफ किया कि वह सिर्फ अपना रियाज़ कर रहे थे, लेकिन वीडियो बनाने वाले ने पीछे दुख भरा संगीत लगा दिया, जिससे वीडियो को ज़रूरत से ज्यादा भावुक और नाटकीय बना दिया गया.
उन्होंने कहा, “मैं भीख नहीं मांग रहा था, मैं अपना रियाज़ कर रहा था. अपने भगवान के लिए गाना मेरी पूजा, मेरा काम और मेरा आत्मसम्मान है. सिर्फ इसलिए कि एक कलाकार देख नहीं सकता, वह भिखारी नहीं बन जाता.”
सुनील ने आगे कहा कि जब से उन्होंने तंबूरा उठाया है, तब से हनुमान उनकी “सांसों की लय” हैं.
हनुमान अंश की कहानी लक्ष्मण दास के शुरुआती जीवन पर आधारित है. लक्ष्मण दास 13 साल की उम्र में अपना घर छोड़कर चले गए थे और आगे चलकर नीम करोली बाबा बने. फिल्म में उनके हनुमान से जुड़ाव और उनके जीवन से जुड़े चमत्कारों की कहानी दिखाई गई है.
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