नयी दिल्ली, 27 मार्च (भाषा) दिल्ली के मयूर विहार स्थित सलवान पब्लिक स्कूल के छात्रों के अभिभावकों ने शुक्रवार को शिक्षा निदेशालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।
अभिभावकों ने यह आरोप लगाया है कि स्कूल ने ‘मनमानी’ फीस वृद्धि का भुगतान न करने के कारण उनके बच्चों के परिणाम रोक रखे हैं।
एक अभिभावक मोहित अरोड़ा ने बताया कि स्कूल ने 40 से अधिक छात्रों को नोटिस जारी कर सूचित किया है कि बढ़ी हुई फीस का भुगतान न करने के कारण उनके नाम स्कूल के रिकॉर्ड से हटा दिए गए हैं।
अरोड़ा ने आरोप लगाया, “स्कूल ने न तो छात्रों के परिणाम जारी किए हैं और न ही अभिभावकों द्वारा प्रस्तुत किसी आवेदन या नोटिस का जवाब दिया है।”
हालांकि, स्कूल की प्रधानाध्यापिका ऋचा शर्मा कात्याल ने इन दावों का खंडन करते हुए कहा कि किसी भी छात्र को परीक्षा में बैठने से नहीं रोका गया है और परिणाम ऑनलाइन अपलोड कर दिए गए हैं।
उन्होंने कहा, “हमने परिणामों की कोई भौतिक प्रति जारी नहीं की है, बल्कि उन्हें वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है। पिछले शैक्षणिक वर्ष की बकाया फीस का भुगतान न करने वाले अभिभावकों को सूचित कर दिया गया है कि उनके बच्चों के नाम अगले शैक्षणिक वर्ष के लिए स्कूल के रिकॉर्ड से हटा दिए जाएंगे।”
प्रदर्शनकारियों ने “शिक्षा एक अधिकार है, कोई व्यापारिक लड़ाई नहीं”, “महंगी शिक्षा, महंगा ज्ञान, कैसे बनेगा देश महान” और “निजी स्कूलों की मनमानी, सरकार की विफलता” जैसे नारे लिखे हुए तख्तियां ले रखी थीं।
एक प्रदर्शनकारी अभिभावक ने दावा किया कि स्कूल उनकी आर्थिक क्षमता से अधिक फीस की मांग कर रहा है।
उन्होंने पूछा, “मैं इतनी कमाई नहीं करता कि इतनी अधिक फीस का भुगतान कर सकूं। मेरे पास क्या विकल्प है? क्या मुझे अपने बच्चों को स्कूल से निकाल लेना चाहिए और उन्हें घर पर रहने के लिए कहना चाहिए?”
स्कूल ने बुधवार को लगभग 40 अभिभावकों को नोटिस जारी कर कहा कि यदि बकाया फीस का भुगतान नहीं किया गया, तो 31 मार्च से छात्रों के नाम स्कूल के रिकॉर्ड से हटा दिए जाएंगे।
नोटिस में दिल्ली स्कूल शिक्षा नियम, 1973 के नियम 35 का हवाला दिया गया है, जो स्कूलों को फीस का भुगतान न करने की स्थिति में छात्र का नाम स्कूल के रिकॉर्ड से हटाने की अनुमति देता है।
इसमें यह भी कहा गया है कि गैर-सरकारी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को शैक्षणिक वर्ष के लिए फीस तय करने के लिए शिक्षा निदेशालय से पूर्व अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है और इसके लिए विभिन्न अदालती फैसलों का हवाला दिया गया है।
भाषा
राखी दिलीप
दिलीप
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