भोपाल, 18 मार्च (भाषा) भारतीय सेना की दक्षिणी कमान ने 13 दिवसीय अभ्यास ‘अमोघ ज्वाला’ का आयोजन किया, जिसका उद्देश्य बहु-क्षेत्रीय परिचालन वातावरण में अपनी प्रौद्योगिकी-संचालित मशीनीकृत युद्ध क्षमताओं को मजबूती प्रदान करना है।
उत्तर प्रदेश के बबीना फील्ड फायरिंग रेंज में छह मार्च को शुरू हुआ यह अभ्यास बुधवार को समाप्त हुआ।
सेना की एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने अभ्यास के समापन का अवलोकन किया और भाग लेने वाले सैनिकों को उनकी व्यावसायिकता, परिचालन उत्कृष्टता और युद्ध की तैयारी के लिए बधाई दी।
उन्होंने कहा कि तकनीक को आत्मसात करना और भूमि, वायु, साइबर, अंतरिक्ष, खुफिया निगरानी और टोही (आईएसआर) एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (ईडब्ल्यू) क्षमताओं का निर्बाध एकीकरण एक चुस्त, अनुकूलनीय तथा युद्ध के लिए तैयार बल के निर्माण के लिए आवश्यक है, जो बहु-क्षेत्रीय ऑपरेशन के लिए सक्षम बनाता है।
उन्होंने कहा कि इस अभ्यास ने आधुनिक युद्ध के लिए प्रासंगिक नयी परिचालन अवधारणाओं, बल संरचनाओं, प्रक्रियाओं और प्रोटोकॉल को मजबूती प्रदान करने का प्रयास किया है।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि इसने एक मजबूत कमांड और नियंत्रण वास्तुकला के तहत हमलावर हेलीकॉप्टरों, लड़ाकू विमानों, मानव रहित हवाई प्रणाली, काउंटर-ड्रोन सिस्टम और नेटवर्क-सक्षम युद्धक्षेत्र मंचों के साथ मशीनीकृत बलों के एकीकृत बल का प्रदर्शन किया।
बयान में कहा गया है कि इस अभ्यास में सिंक्रोनाइज्ड फायर और पैंतरेबाजी के साथ उच्च-गति वाले मशीनीकृत संचालन, वास्तविक समय ड्रोन-सक्षम निगरानी और लक्ष्य अधिग्रहण, सटीक जुड़ाव और उन्नत युद्धक्षेत्र प्रौद्योगिकियों का निर्बाध एकीकरण शामिल था।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि उन्नत निगरानी प्रणाली, सुरक्षित संचार नेटवर्क और सटीक मारक क्षमता ने युद्ध के मैदान की पारदर्शिता को बढ़ाया और तेजी से, वास्तविक समय में निर्णय लेने में सक्षम बनाया।
बयान में कहा गया है कि इन अभ्यासों में इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, वायु रक्षा और रात में लड़ने की क्षमताओं के साथ-साथ खुफिया, निगरानी और टोही संपत्ति के प्रभावी संलयन पर प्रकाश डाला गया, जो एक नेटवर्क और भविष्य के लिए तैयार बल की बढ़ती युद्ध क्षमता को दर्शाता है।
भाषा ब्रजेन्द्र सुरभि
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