गाजियाबाद (उप्र), 12 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय द्वारा ‘इच्छा मृत्यु’ की इजाजत दिए जाने के एक दिन बाद बृहस्पतिवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी के नेतृत्व में डॉक्टरों की एक टीम ने हरीश राणा (31) के आवास का दौरा किया।
वहीं, परिवार ने कहा कि हरीश को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में कब स्थानांतरित किया जाए, इस पर निर्णय अभी तक नहीं लिया गया है।
उच्चतम न्यायालय ने 12 साल से ज्यादा समय से कोमा में जीवन-रक्षक प्रणाली (वेंटिलेटर) के सहारे सांस ले रहे हरीश राणा को वेंटिलेटर से हटाकर ‘इच्छा मृत्यु’ की अनुमति दे दी।
हरीश राणा 20 अगस्त 2013 में एक इमारत की चौथी मंजिल से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को हरीश राणा को इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान को निर्देश दिया कि वह प्रक्रिया में गरिमा सुनिश्चित करते हुए उपचार वापस लेने के लिए एक योजना तैयार करे।
हरीश के पिता अशोक राणा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि परिवार फिलहाल चिकित्सा अधिकारियों के साथ स्थिति पर चर्चा कर रहा है और उसे अस्पताल में स्थानांतरित करने के लिए कोई समयसीमा तय नहीं की है।
उन्होंने कहा, ‘‘मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने डॉक्टरों की एक टीम के साथ आज हमसे मुलाकात की, और हम फिलहाल स्थिति पर चर्चा कर रहे हैं। हम नहीं कह सकते कि मेरा बेटा कब आखिरी सांस लेगा; यह समय एक सप्ताह या 15 दिन हो सकता है।’’
अधिकारियों द्वारा घोषित वित्तीय सहायता के बारे में सवालों के जवाब में, अशोक राणा ने कहा, ‘‘मैं इस समय किसी की मदद नहीं लेना चाहता; मैंने इसके बारे में सोचा भी नहीं है। मेरे बेटे की सांसारिक यात्रा पूरी होने के बाद ही मैं इन मामलों पर विचार करूंगा।’’
इस बीच, जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने बृहस्पतिवार को कहा कि राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से परिवार के लिए 10 लाख रुपये की वित्तीय सहायता मंजूर की है।
उन्होंने कहा कि परिवार को एक स्थायी दुकान भी मुफ्त में आवंटित की जाएगी क्योंकि हरीश को लंबे समय तक चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता के कारण पिछले 12 वर्षों में उनकी वित्तीय स्थिति खराब हो गई थी।
भाषा सं जफर शफीक
शफीक
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