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Tuesday, 31 March, 2026
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पर्यावरणविदों ने दिल्ली के वनक्षेत्र को लेकर तैयार सरकारी रिपोर्ट पर सवाल उठाया

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(अपर्णा बोस)

नयी दिल्ली, 12 जून (भाषा) दिल्ली में गत तीन साल में कम से कम 77 हजार पेड़ों को काटने या स्थानांतरित करने की जानकारी सामने आने के बाद पर्यावरण विशेषज्ञों ने इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (आईएसएफआर) पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है जिसके मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी में वन क्षेत्र बढ़ रहा है।

सरकार द्वारा उच्च न्यायालय में हाल में दाखिल आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली वन विभाग ने गत तीन साल के दौरान शहर में विकास कार्यों के लिए कम से कम 77 हजार पेड़ों को काटने की अनुमति दी है जिसका अभिप्राय है कि तीन पेड़ हर घंटे कटे।

इसके उलट केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा 13 जनवरी 2022 को जारी आईएसएफआर की रिपोर्ट में कहा गया कि दिल्ली में हरित क्षेत्र गत दो साल में 21.88 प्रतिशत से बढ़कर 23.06 प्रतिशत हो गया है।

इन ‘‘विरोधाभासी आंकड़ो’’पर पर्यावरण कार्यकर्ता भावरीन कंधारी ने ‘‘पीटीआई-भाषा’से कहा कि कथित हरित क्षेत्र में बढ़ोतरी भारतीय वन सर्वेक्षण की ‘‘वन को लेकर समस्यागत और विरोधाभासी परिभाषा’’ की वजह से है।

उन्होंने कहा, ‘‘नयी परिभाषा के तहत साफ इलाके भी वन के तौर पर गिने जा सकते हैं। हालांकि, जमीन पर किसी तरह के पेड़-पौधे है और कैसे वन के तौर पर उन्हें शामिल करना वैध है, यह अनुभवी क्षेत्रीय अनुसंधाकर्ताओं के लिए भी मुश्किल अनुभव है।

उन्होंने कहा कि सभी उपलब्ध सबूतों से लगता है कि आईएसएफआर चाय बागानों, नारियल के बागानों, निर्माण क्षेत्र में लगे वृक्षों, रेगिस्तान की झाड़ियों और और कुछ गोल्फ के मैदान को भी वन के तौर पर चिह्नित करता है जो आकस्मिक नहीं है।

कंधारी ने कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि यह जानबूझकर रुख अपनाया गया है।’’

आईएसएफआर ने कहा कि दिल्ली में वृक्षों से अच्छादित क्षेत्र वर्ष 2019 में 129 वर्ग किलोमीटर था जो वर्ष 2021 में बढ़कर 147 वर्ग किलोमीटर हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में हरित क्षेत्र 324.44 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 342 वर्ग किलोमीटर हो गया है।

पर्यावरणविद रवीना कोहली ने कहा कि विशेषज्ञों ने सरकार को जिस तरह से वृक्षारोपण किया जा रहा है उसमें ‘‘ घोर असफलता’’को लेकर आगाह किया है।

उन्होंने कहा कि हमारे पर्यावरण की गुणवत्ता की कीमत पर विकास ‘‘चौतरफा नुकसान’’ वाला होगा और यह सरकारों पर भी ‘‘विपरीत प्रभाव डालेगा।’’

भाषा धीरज नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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