नयी दिल्ली, 27 मार्च (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को कहा कि उसने दिल्ली में 45 करोड़ रुपये की जमीन को ‘धोखाधड़ी’ से खरीदने से जुड़े धन शोधन के एक नए मामले में अल फलाह समूह के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी को फिर से गिरफ्तार किया है।
सिद्दीकी (61) को पहली बार नवंबर 2025 में संघीय जांच एजेंसी ने धनशोधन के एक अलग मामले में गिरफ्तार किया था, जो उसके शिक्षण संस्थानों की मान्यता और प्रमाणन को गलत तरीके से प्रस्तुत करके छात्रों के साथ कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है।
फरीदाबाद (हरियाणा) स्थित विश्वविद्यालय 10 नवंबर, 2025 को लाल किला के पास हुए विस्फोट से जुड़े एक ‘सफेश पोश’ आतंकी मॉड्यूल की जांच के दौरान संदेह के घेरे में आया था। इस विस्फोट में 15 लोगों की मौत हो गई थी।
विश्वविद्यालय से जुड़े अस्पताल के चिकित्सकों में से एक, डॉ. उमर-उन-नबी पर इस मामले में आत्मघाती हमलावर होने का आरोप है। उसी दिन विस्फोटक से भरी कार चलाते समय उसकी मौत हो गई थी।
अधिकारियों ने बताया कि सिद्दीकी को नवीनतम मामले में 24 मार्च को तिहाड़ जेल से हिरासत में लिया गया था, जहां वह ईडी और दिल्ली पुलिस के मामलों में न्यायिक हिरासत में है।
एजेंसी ने एक बयान में कहा कि उसे अगले दिन साकेत (दक्षिण दिल्ली) स्थित विशेष धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत के समक्ष पेश किया गया और उसे चार अप्रैल तक ईडी की हिरासत में भेज दिया गया।
जांच में पता चला कि जमीन को धोखाधड़ी से खरीदने के लिए ‘जाली’ दस्तावेज तैयार किए गए और उनका इस्तेमाल किया गया, और तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन के निदेशक सिद्दीकी ने कुछ व्यक्तियों के साथ मिलकर इस जालसाजी को अंजाम दिया।
राष्ट्रीय राजधानी के मदनपुर खादर गांव में ‘खसरा नंबर 792’ में स्थित 1.14 एकड़ जमीन का मूल्य ईडी के अनुसार 45 करोड़ रुपये है।
एजेंसी ने बताया कि दस्तावेजों में जमीन की खरीद के लिए दी गई राशि 75 लाख रुपये थी। ईडी ने कहा कि धन के पूरे लेन-देन का पता लगाने और अन्य लाभार्थियों की पहचान करने के प्रयास जारी हैं।
एजेंसी ने पहले मामले की जांच में आरोप लगाया था कि विश्वविद्यालय ने 2018 और 2025 के बीच 415.10 करोड़ रुपये जुटाए और छात्रों से एकत्र की गई धनराशि का इस्तेमाल निजी काम के लिये किया गया।
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