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Wednesday, 11 February, 2026
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भारत का खाद्य सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए ‘3एस’ रणनीति अपनाने का आह्वान

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(लक्ष्मी देवी)

इंदौर, 14 फरवरी (भाषा) भारत ने मंगलवार को जी20 देशों से वैश्विक खाद्य सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए कृषि पारिस्थितिकी तंत्र के लिए ‘3एस’ रणनीति – स्मार्ट, सस्टेनेबल (टिकाऊ) और सर्व – अपनाने का आह्वान किया।

केंद्रीय नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने यहां जी20 के कृषि उप-प्रमुखों की पहली बैठक से इतर मीडिया से बातचीत में कहा कि भारत के लिए कृषि हमेशा प्राथमिकता रही है और दुनिया के सामने यह बात अब पूरी तरह सामने आ गई है।

सिंधिया ने कहा, ‘‘हमारी सोच यह है कि हमें विश्व खाद्य प्रणाली पर अपनी छाप छोड़ने के लिए कृषि पारिस्थितिकी तंत्र के लिए 3एस रणनीति अपनानी होगी।’’

उन्होंने कहा कि 3एस रणनीति ‘स्मार्ट’ और ‘टिकाऊ’ खेती है जिससे सभी की ‘सेवा’ की जानी चाहिए। स्मार्ट कृषि के लिए सिंधिया ने फसल की पैदावार बढ़ाने के लिए ड्रोन और अन्य नई तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया।

टिकाऊ कृषि के लिए किसानों को उन्नत प्रौद्योगिकियों और विपणन पर ध्यान देने के अलावा अधिक उपज प्राप्त करने, बेहतर कृषि आदानों का उपयोग करने पर ध्यान देना चाहिए।

सिंधिया ने कहा कि भारत ने कृषि में महत्वपूर्ण प्रगति की है। यह दूध उत्पादन में दुनिया का शीर्ष देश है, सब्जियों और फलों में दूसरे और खाद्यान्न उत्पादन में तीसरे नंबर का देश है।

पिछले आठ साल में भारत का खाद्यान्न उत्पादन 26.5 करोड़ टन से बढ़कर 31.5 करोड़ टन हो गया है। उन्होंने कहा कि पिछले आठ साल में कृषि क्षेत्र के लिए बजटीय परिव्यय साढ़े चार गुना बढ़ाकर 10.5 अरब डॉलर (लगभग 86,700 करोड़ रुपये) कर दिया गया है।

नागर विमानन और इस्पात मंत्री सिंधिया ने यह भी उल्लेख किया कि उनके गृह राज्य मध्य प्रदेश ने भी कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है और यह सोया और लहसुन का एक प्रमुख प्रदेश है।

राज्य का खाद्यान्न उत्पादन पिछले 18 वर्षों में 165 लाख टन से लगभग चार गुना होकर 629 लाख टन हो गया। उन्होंने कहा कि राज्य में सिंचाई में 50 प्रतिशत का सुधार हुआ है।

उन्होंने कहा, ‘‘चर्चा के नतीजे के आधार पर, भारत और जी-20 देश, दुनिया को कृषि के लिए एक नयी रूपरेखा मुहैया कराएंगे।’’

भारत की जी20 अध्यक्षता के तहत कृषि कार्य समूह (एडब्ल्यूजी) की पहली कृषि उप-प्रमुखों की बैठक यहां 13-15 फरवरी तक आयोजित की जा रही है।

बैठक के दूसरे दिन चार प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर विचार-विमर्श होगा। ये हैं- खाद्य सुरक्षा और पोषण, जलवायु स्मार्ट दृष्टिकोण के साथ टिकाऊ कृषि, समावेशी कृषि मूल्य श्रृंखला और खाद्य आपूर्ति प्रणाली और कृषि बदलाव का डिजिटलीकरण। 15 फरवरी को आयोजन के अंतिम दिन प्रतिनिधि एडब्ल्यूजी के प्रमुख निष्कर्षो पर विचार-विमर्श करेंगे।

जी-20 डडब्ल्यूजी की अगली बैठकें चंडीगढ़, वाराणसी और हैदराबाद में होने की संभावना है।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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