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Friday, 12 July, 2024
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थोक महंगाई लगातार छठे महीने गिरी, सितम्बर में शू्न्य से 0.26% नीचे

थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति अप्रैल से लगातार शून्य से नीचे बनी है. अगस्त में यह शून्य से 0.52 प्रतिशत नीचे थी.

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नई दिल्ली : आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित भारत में थोक महंगाई लगातार सितम्बर में छठे महीने नकारात्मक बनी रही. सितम्बर में यह शून्य से 0.26 प्रतिशत नीचे रही है.

इस साल अप्रैल में यह नकारात्मक हुई. इसी तरह, कोविड के शुरुआती दिनों में, जुलाई 2020 में, WPI को नकारात्मक बताया गया था.

थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति अप्रैल से लगातार शून्य से नीचे बनी है. अगस्त में यह शून्य से 0.52 प्रतिशत नीचे थी.

सितम्बर 2022 में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 10.55 प्रतिशत थी. खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति पिछले दो महीनों में दोहरे अंक में रहने के बाद, सितंबर में घटकर 3.35 प्रतिशत हो गई. अगस्त में यह 10.60 प्रतिशत थी.

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सितम्बर में थोक मुद्रास्फीति अगस्त में (-) 0.52 प्रतिशत के मुकाबले (-) 0.26 प्रतिशत और जुलाई के पिछले महीने (-) 1.23 प्रतिशत पर आ गई.

सितम्बर में अपस्फीति मुख्य रूप से पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में रासायनिक और रासायनिक उत्पादों, खनिज तेल, कपड़ा, बुनियादी धातुओं और खाद्य उत्पादों की कीमतों में गिरावट के कारण रही है.

सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा 12 अक्टूबर को कहा गया था कि सितम्बर में मुख्य खुदरा मुद्रास्फीति गिरकर 3 महीने के निचले स्तर 5.02 प्रतिशत पर आ गई है, जिसके बाद डब्ल्यूपीआई डेटा सामने आया है.

सरकार मासिक आधार पर हर महीने की 14 तारीख (या अगले कार्य दिवस) पर थोक मूल्यों के सूचकांक जारी करती है. सूचकांक संख्या संस्थागत स्रोतों और देशभर में चयनित विनिर्माण इकाइयों से प्राप्त आंकड़ों से संकलित की जाती है.

अक्टूबर 2022 में कुल मिलाकर थोक मुद्रास्फीति 8.39 प्रतिशत थी और तब से इसमें गिरावट आई है. विशेष रूप से, थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति पिछले साल सितम्बर तक लगातार 18 महीनों तक दोहरे अंक में रही थी.

इस बीच, भारत में खुदरा मुद्रास्फीति सितम्बर में फिर से आरबीआई के 2-6 प्रतिशत के आसान स्तर पर वापस आ गई है, लेकिन आदर्श 4 प्रतिशत के परिदृश्य से ऊपर है. सितम्बर में खुदरा महंगाई दर 5.02 फीसदी थी.

हालिया रुकावटों को छोड़कर, आरबीआई ने महंगाई रोकने के लिए मई 2022 से रेपो दर में 250 आधार अंक की बढ़ोत्तरी की है. ब्याज दरें बढ़ाना मौद्रिक नीति का हिस्सा है जो आमतौर पर अर्थव्यवस्था में मांग को दबाने में मदद करती है, जिससे मुद्रास्फीति दर में गिरावट में मदद मिलती है.

ईंधन व बिजली खंड की मुद्रास्फीति सितंबर में शून्य से 3.35 प्रतिशत नीचे रही, जो अगस्त में शून्य से 6.03 प्रतिशत नीचे थी.

विनिर्मित उत्पादों की मुद्रास्फीति सितंबर में शून्य से 1.34 प्रतिशत नीचे रही. अगस्त में यह शून्य से 2.37 प्रतिशत नीचे थी.

राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (एनएसओ) की ओर से पिछले सप्ताह जारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में खुदरा मुद्रास्फीति सालाना आधार पर घटकर तीन महीनों के निचले स्तर 5.02 प्रतिशत पर आ गई. सब्जियों एवं ईंधन की कीमतें कम होना इसकी मुख्य वजह रही.

(एएनआई और भाषा के इनपुट्स के साथ)


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