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Sunday, 22 March, 2026
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पश्चिम एशिया संघर्ष का कारोबार पर सीमित असर, 95 प्रतिशत परियोजनाएं जारी: एलएंडटी

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मुंबई, 22 मार्च (भाषा) इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण क्षेत्र की प्रमुख कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का उनके व्यवसाय पर फिलहाल कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है, क्योंकि लगभग 95 प्रतिशत परियोजनाएं सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं।

कंपनी ने कहा कि लॉजिस्टिक और आपूर्ति शृंखला को लेकर मुख्य चुनौती है, और अगर स्थिति जस की तस बनी रही तो राजस्व पर जोखिम हो सकता है।

एलएंडटी के उप प्रबंध निदेशक सुब्रमणियन शर्मा ने सप्ताहांत में संवाददाताओं को बताया कि कंपनी को राजस्व पर तत्काल कोई प्रभाव नहीं दिख रहा है क्योंकि जिन पांच प्रतिशत परियोजनाओं पर काम रुका हुआ है, वे कुल राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान नहीं देती हैं।

उन्होंने कहा कि अगर तीन महीने में लॉजिस्टिक संबंधी समस्याओं का समाधान नहीं होता है, तो राजस्व में देरी के रूप में इसका प्रभाव पड़ सकता है।

ऊर्जा कारोबार के प्रमुख शर्मा ने कमाई पर असर से जुड़े सवालों का सीधे जवाब नहीं दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि बढ़ी हुई लागत का प्रभाव ग्राहकों तक बढ़ाया जा सकेगा।

शर्मा ने कहा कि कंपनी की किसी भी साइट पर हमला नहीं हुआ है और पश्चिम एशिया में कंपनी के सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं। क्षेत्र में 100 परियोजनाओं में से पांच पर काम बंद है।

उन्होंने कहा कि कंपनी के पश्चिम एशिया में 8,000 कर्मचारी और उनके 2,000 परिवार के सदस्य हैं, साथ ही 20,000 ठेकेदार कर्मचारी कार्यरत हैं, और किसी ने भी लौटने में रुचि नहीं दिखाई। हालांकि, संघर्ष शुरू होने के बाद से कंपनी ने नए कर्मचारियों को भेजना रोक दिया है।

आपूर्ति शृंखला की चुनौतियों पर शर्मा ने कहा कि कंपनी आमतौर पर परियोजना स्थल पर तीन महीने तक चलने वाली आपूर्ति रखती है, और पिछले दो हफ्तों में आपूर्ति शृंखलाओं में व्यवधान देखा गया है।

शर्मा ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण भारत का आयात बिल बढ़ने की चिंताओं के बीच कंपनी यह उम्मीद कर रही है कि सरकार अपने पूंजीगत व्यय को जारी रखेगी, भले ही इससे राजकोषीय घाटा बढ़ जाए।

अधिकारी ने कहा कि कंपनी का मानना है कि यदि जरूरत पड़े तो भारत सरकार को अपने पूंजीगत खर्च को जारी रखने के लिए और अधिक ऋण लेना चाहिए।

उन्होंने बताया, ‘तेल और गैस की कीमतों के कारण आयात बिल बढ़ेगा। सरकार को इसे संतुलित करना होगा। वे शायद अस्थायी रूप से घाटा बढ़ाएंगे, हो सकता है कि वे और अधिक ऋण लें।’

शर्मा ने कहा, ‘कुल मिलाकर देखें तो हमारी राजकोषीय स्थिति काफी अच्छी है। हमारे पास इतनी गुंजाइश है कि हम बुनियादी ढांचे के पूंजीगत खर्च में कोई समझौता न करें।’

उन्होंने यह भी बताया कि कोविड महामारी के प्रभाव के बाद भारत ने राजकोषीय घाटे को कम करने में सफलता हासिल की है। शर्मा ने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए बुनियादी ढांचे पर खर्च करना जरूरी है।

भाषा योगेश पाण्डेय

पाण्डेय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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