नयी दिल्ली, 22 मार्च (भाषा) दिग्गज कारोबारी समूह वेदांता ग्रुप ने जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) के अधिग्रहण के मामले में एनसीएलएटी का रुख किया है। कंपनी ने जेएएल को 14,535 करोड़ रुपये में अधिग्रहित करने के लिए अदाणी समूह की बोली को मिली राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की मंजूरी को चुनौती दी है।
अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाला वेदांता समूह दिवाला प्रक्रिया के जरिये जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड को हासिल करने की दौड़ में शामिल था, लेकिन कर्जदाताओं ने पिछले साल नवंबर में अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की समाधान योजना या बोली को मंजूरी दे दी थी।
एनसीएलटी की इलाहाबाद पीठ ने 17 मार्च को दिवाला प्रक्रिया के जरिए जेपी एसोसिएट्स के अधिग्रहण के लिए अदाणी एंटरप्राइजेज की 14,535 करोड़ रुपये की बोली को मंजूरी दी थी। जेपी एसोसिएट्स ने शेयर बाजार को बताया था कि एनसीएलटी ने ”17 मार्च, 2026 को मौखिक रूप से आदेश सुनाते हुए” अदाणी की योजना को मंजूरी दी है।
खनन क्षेत्र की दिग्गज कंपनी वेदांता ने अब उक्त एनसीएलटी आदेश के खिलाफ राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में अपील दायर की है। यह मामला सोमवार को चेयरपर्सन न्यायमूर्ति अशोक भूषण और सदस्य (तकनीकी) बरुण मित्रा की दो सदस्यीय पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।
पिछले साल नवंबर में कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) ने जेपी एसोसिएट्स के अधिग्रहण के लिए गौतम अदाणी की समाधान योजना को मंजूरी दी थी। अदाणी एंटरप्राइजेज ने इस बोली को जीतने के लिए वेदांता और डालमिया भारत को पीछे छोड़ दिया था। अदाणी को कर्जदाताओं से सर्वाधिक 89 प्रतिशत वोट मिले थे, जिसके बाद डालमिया सीमेंट (भारत) और वेदांता समूह का स्थान था।
जेपी एसोसिएट्स के पास रियल एस्टेट, सीमेंट विनिर्माण, आतिथ्य, बिजली और इंजीनियरिंग तथा निर्माण क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाली संपत्तियां हैं। कंपनी कुल 57,185 करोड़ रुपये के ऋण भुगतान में चूक कर गई थी।
भाषा पाण्डेय
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