scorecardresearch
Monday, 23 March, 2026
होमदेशअर्थजगतबेमौसम बारिश से शुरुआती गर्मी की मांग प्रभावित होने की आशंका, एसी विनिर्माता कंपनियां सतर्क

बेमौसम बारिश से शुरुआती गर्मी की मांग प्रभावित होने की आशंका, एसी विनिर्माता कंपनियां सतर्क

Text Size:

नयी दिल्ली, 22 मार्च (भाषा) देश के कई हिस्सों में हाल ही में हुई बेमौसम बारिश के बाद एयर कंडीशनर (एसी) बनाने वाली कंपनियां सतर्क हो गई हैं।

कंपनियों को आशंका है कि इससे गर्मी की शुरुआत में एसी की मांग प्रभावित हो सकती है, जबकि यही समय उनकी बिक्री के लिए सबसे अहम होता है।

उद्योग जगत की चिंता सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं है।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे माल, खासकर प्लास्टिक की कीमतें बढ़ रही हैं। साथ ही एलपीजी गैस की आपूर्ति भी कम हो गई है, जिससे उत्पादन पर असर पड़ रहा है।

कंपनियों का कहना है कि प्लास्टिक महंगा होने से वॉशिंग मशीन और फ्रिज जैसे बड़े घरेलू उपकरणों की कीमतें 10 से 12 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं।

आमतौर पर मार्च महीने में गर्मी बढ़ने लगती है और ठंडक प्रदान करने वाले उत्पादों की मांग तेज हो जाती है, लेकिन इस बार मौसम के बदले रुख से कंपनियां असमंजस में हैं। हालांकि, उन्हें उम्मीद है कि अप्रैल में तापमान बढ़ेगा और मांग भी सुधरेगी।

गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप के उपकरण कारोबार के प्रमुख कमल नंदी ने कहा कि अगले हफ्ते के बाद दिल्ली और उत्तर भारत में तापमान बढ़ने के संकेत हैं।

उन्होंने कहा कि अभी बिक्री पर असर को लेकर कुछ कहना जल्दबाजी होगी।

नंदी ने कहा कि कंपनियां इस साल पहले ही कीमतें बढ़ा चुकी हैं, जब जनवरी से नए ऊर्जा लेबलिंग नियम लागू हुए।

अब कच्चे माल और ढुलाई लागत बढ़ने के कारण अप्रैल में फिर से कीमतें बढ़ाई जा सकती हैं। गोडरेज ने एक अप्रैल से एसी की कीमतों में पांच से 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का संकेत दिया है।

हायर इंडिया के अध्यक्ष एन. एस. सतीश ने बताया कि कारखानों को मिलने वाली एलपीजी गैस की आपूर्ति कम कर दी गई है। अगर यह स्थिति बनी रहती है तो गर्मी के व्यस्त सीजन से पहले उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक कटौती करनी पड़ सकती है।

सरकार ने घरेलू रसोई गैस को प्राथमिकता देने के लिए उद्योगों को मिलने वाली एलपीजी आपूर्ति को उनकी औसत खपत के 80 प्रतिशत से घटाकर 65 प्रतिशत कर दिया है। इससे एसी विनिर्माण में इस्तेमाल होने वाली प्रक्रियाओं पर असर पड़ रहा है।

सतीश ने यह भी कहा कि प्लास्टिक महंगा होने से कंपनियों की लागत बढ़ रही है और इसका असर ग्राहकों पर पड़ेगा।

उन्होंने बताया कि वॉशिंग मशीन की कुल लागत का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा प्लास्टिक का होता है, इसलिए कीमतें बढ़ाना जरूरी हो गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतें बढ़ने पर ग्राहक महंगे मॉडल के बजाय सस्ते या कम क्षमता वाले उत्पाद खरीद सकते हैं।

भाषा योगेश अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments