नयी दिल्ली, 16 मार्च (भाषा) नागर विमानन मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि डिजियात्रा पहल के तहत हवाई यात्रियों के आंकड़े उनके अपने उपकरणों में रखे (सेव) जाते हैं और इन सूचनाओं को किसी एक जगह जमा नहीं किया जाता है।
डिजियात्रा एक बायोमीट्रिक बोर्डिंग प्रणाली है, जो हवाई अड्डों पर यात्रियों को परेशानी मुक्त अनुभव देने के लिए चेहरे की पहचान तकनीक का इस्तेमाल करती है।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘‘डिजियात्रा के तहत, यात्रियों के आंकड़े उनके अपने उपकरण में संग्रहीत होते हैं, न कि केंद्रीकृत भंडारण में। डिजियात्रा प्रक्रिया में यात्रियों की व्यक्तिगत पहचान योग्य सूचना (पीआईआई) को किसी एक जगह जमा नहीं किया जाता है।”
बयान में कहा गया, ‘‘यात्रियों के सभी आंकडों को एन्क्रिप्ट किया गया है और उनके स्मार्टफोन के वॉलेट में संग्रहीत किया गया है। इसे केवल यात्री और यात्रा के मूल हवाई अड्डे के बीच साझा किया जाता है, जहां यात्री की डिजियात्रा आईडी को सत्यापित करने की जरूरत होती है।’’
मंत्रालय ने यह भी कहा कि उड़ान के प्रस्थान के 24 घंटे के भीतर हवाई अड्डे की प्रणाली से आंकड़ों को मिटा दिया जाता है।
पहले चरण में तीन हवाई अड्डों – दिल्ली, बेंगलुरु और वाराणसी में डिजियात्रा सुविधा शुरू की गई है।
भाषा पाण्डेय अजय
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