scorecardresearch
Wednesday, 18 March, 2026
होमदेशअर्थजगतट्रंप प्रशासन की शुल्क नीति से अमेरिकी वृद्धि पर होगा प्रतिकूल असरः हार्वर्ड प्रोफेसर

ट्रंप प्रशासन की शुल्क नीति से अमेरिकी वृद्धि पर होगा प्रतिकूल असरः हार्वर्ड प्रोफेसर

Text Size:

(बिजय कुमार सिंह)

नयी दिल्ली, एक अक्टूबर (भाषा) हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रख्यात अर्थशास्त्री केनेथ रोगॉफ ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत सहित कई देशों पर ऊंचा आयात शुल्क लगाने और एच-1बी वीजा शुल्क में भारी वृद्धि से अमेरिका की आर्थिक वृद्धि पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

रोगॉफ ने पीटीआई-वीडियो से बातचीत में कहा कि उच्च कौशल वाले कर्मचारियों के वीजा उदार तरीके से जारी होने चाहिए लेकिन मौजूदा नियम ‘हड़बड़ी और बिना सोचे-समझे’ बनाए गए हैं।

अमेरिका ने एच-1बी वीजा के आवेदन शुल्क को बढ़ा दिया है जिससे इस वीजा के सबसे अधिक लाभार्थी भारतीय पेशेवरों पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप कैलिफोर्निया की सिलिकॉन वैली में जाएं तो वहां भारतीय इंजीनियरों और तकनीकी पेशेवरों की संख्या बेहद बड़ी है। अगर इन प्रतिभाओं को आने से रोका गया तो इसके बहुत बड़े दुष्परिणाम होंगे।’’

अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री रोगॉफ ने कहा कि अमेरिकी कंपनियां एच-1बी वीजा के प्रायोजन पर 2,000 से 5,000 डॉलर तक का शुल्क देती हैं।

उन्होंने कहा कि यह ‘शुल्क’ लगाना ट्रंप प्रशासन की गलती है और अमेरिकी सरकार को वीज़ाओं की संख्या बढ़ानी चाहिए।

रेगॉफ ने कहा कि ट्रंप प्रशासन का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने से द्विपक्षीय संबंधों में तनाव बढ़ा है।

उन्होंने कहा, ‘‘यदि मैं उन कारकों को देखूं जो अमेरिकी वृद्धि को रोक रहे हैं तो शुल्क एक कारण है, लेकिन आव्रजन पर प्रतिबंध उससे भी बड़ा कारण है।’’

भारत के संदर्भ में रोगॉफ ने कहा कि उसे अपने ऊंचे शुल्क कम करने होंगे और छोटे एवं मध्यम उद्योगों के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी वातावरण तैयार करना होगा।

उन्होंने कहा कि लंबे समय में भारत आठ से लेकर नौ प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल कर सकता है।

ट्रंप प्रशासन की रणनीति पर टिप्पणी करते हुए रोगॉफ ने कहा कि अमेरिका एक समय में किसी एक देश या क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करके आक्रामक सौदेबाजी करना चाहता है लेकिन भविष्य में चीन, भारत, यूरोपीय संघ और ब्राजील जैसे देश मिलकर इसका मुकाबला कर सकते हैं।

भाषा प्रेम प्रेम रमण

रमण

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments