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Saturday, 11 April, 2026
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बिजलीकर्मियों की तीन दिवसीय हड़ताल, सरकार ने कहा- बर्खास्त होंगे काम पर नहीं आने वाले संविदाकर्मी

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लखनऊ, 16 मार्च (भाषा) बिजली कम्पनियों में चेयरमैन और प्रबंध निदेशक के चयन तथा कुछ अन्य मुद्दों को लेकर उत्तर प्रदेश के विद्युतकर्मियों की तीन दिन की हड़ताल बृहस्पतिवार रात 10 बजे शुरू होगी।

सरकार ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए काम पर नहीं लौटने वाले संविदाकर्मियों को बर्खास्त करने और प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ होने पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी है।

इस बीच, बिजलीकर्मियों के एक अन्य धड़े ने इस हड़ताल के मद्देनजर अपने अभियंताओं को दो घंटे अतिरिक्त काम करने को कहा है।

हड़ताल का आह्वान करने वाली ‘विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति’ के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि प्रदेश के करीब एक लाख बिजलीकर्मी आज रात 10 बजे से तीन दिनों की हड़ताल शुरू करेंगे। इनमें अभियंता, कनिष्ठ अभियंता, टेक्नीशियन, आपरेटिंग स्टाफ, लिपिक और अनुबंधित कर्मचारी भी शामिल हैं। प्रदेश में करीब 23 साल बाद बिजलीकर्मियों की पूर्ण हड़ताल हो रही है।

उन्होंने कहा कि तीन दिसम्बर 2022 को प्रदेश सरकार और बिजलीकर्मियों के बीच समझौता हुआ था। सरकार की तरफ से ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने समझौते के बिंदुओं को लागू करने के लिये 15 दिन का समय मांगा था मगर अब तीन महीने से ज्यादा वक्त गुजर चुका है मगर समझौते पर अमल नहीं हुआ।

दुबे ने कहा कि सरकार ने समझौते में कहा था कि बिजली कम्पनियों के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक का चयन मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित एक समिति के जरिये ही किया जाएगा, मगर इस व्यवस्था को बंद करके अब इन पदों पर स्थानांतरण के आधार पर तैनाती की जा रही है। यह टकराव का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है।

इस बीच, प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने शाम में संवाददाता सम्मेलन में हड़ताल को लेकर सख्त रुख अपनाया।

उन्होंने कहा कि संविदा पर कार्यरत बिजलीकर्मी अगर हड़ताल में शामिल होते हैं तो उन्हें बर्खास्त कर दिया जाएगा। हड़ताल के मद्देनजर प्रदेश भर में अलर्ट घोषित किया गया है। बहुत से कर्मचारी काम करना चाहते हैं। अगर किसी ने बिजली कर्मचारियों को काम करने से रोका तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी और यदि हड़ताल के दौरान कोई ‘नुकसान’ पहुंचाया गया तो रासुका के तहत भी कार्रवाई की जाएगी।

शर्मा ने कहा कि हड़ताल से अगर जनता को परेशानी हुई तो सरकार हड़ताल कर रहे बिजलीकर्मियों पर आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (एस्मा) के तहत कार्रवाई करेगी। सरकार ने प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिये बंदोबस्त किये हैं।

बिजली मंत्री ने कहा कि हड़ताल की घोषणा करने वाले संगठनों से सरकार लगातार बात कर रही है। आज भी दो घंटे तक बातचीत हुई मगर ‘हठधर्मी’ लोग बात सुनने को तैयार नहीं हैं। हालांकि सरकार ने बातचीत का रास्ता अब भी खोल रखा है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने बिजलीकर्मियों के साथ पिछली तीन दिसंबर को हुए समझौते के कई बिंदुओं पर कदम उठाये हैं। बाकी बिंदुओं पर भी विचार—विमर्श किया जा रहा है।

इस बीच, बिजलीकर्मियों के एक अन्य धड़े ‘उत्तर प्रदेश पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन’ ने ‘विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति’ द्वारा घोषित हड़ताल के मद्देनजर सभी जिलों में अपने सदस्यों से कहा है कि वे दो घंटे अनिवार्य रूप से अतिरिक्त काम करें ताकि प्रदेश की विद्युत व्यवस्था ठीक रहे।

एसोसिएशन के कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि उन बिजली अभियंताओं को खास तौर से जिम्मेदारी दी गई है जो बाधित बिजली आपूर्ति को ठीक करने में माहिर हैं।

‘विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति’ के संयोजक दुबे ने कहा कि तीन दिसम्बर 2022 को बिजलीकर्मियों और सरकार के बीच हुए समझौते में कई बिन्दुओं पर सहमति बनी थी। इनमें ऊर्जा निगमों के चेयरमैन एवं प्रबन्ध निदेशक का चयन समिति द्वारा किया जाना, पूर्व की तरह मिल रहे तीन पदोन्नति पदों के समयबद्ध वेतनमान के आदेश किया जाना, बिजली कर्मियों के लिए पावर सेक्टर इम्प्लॉईज प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाना और पारेषण के विद्युत उपकेन्द्रों के परिचालन एवं अनुरक्षण की आउटसोर्सिंग को बन्द करना प्रमुख रूप से शामिल हैं।

भाषा सलीम

अर्पणा रमण

रमण

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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