नयी दिल्ली, 31 जनवरी (भाषा) संसद में शुक्रवार को पेश आर्थिक समीक्षा 2024-25 में भारत के लिए एक नई रणनीतिक व्यापार रूपरेखा की जरूरत बताई गई है। साथ ही इसमें वैश्विक स्तर पर बढ़ते संरक्षणवाद के बीच व्यापार लागत में कटौती और निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के उपाय करने का भी आह्वान किया गया है।
इसमें कहा गया है कि व्यापार प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाने की आवश्यकता है।
समीक्षा कहती है, ‘‘ हाल के वर्षों में वैश्विक व्यापार की स्थिति में काफी बदलाव आया है…वैश्वीकरण से बढ़ते व्यापार संरक्षणवाद के चलते अनिश्चितता भी बढ़ी है। इसके चलते भारत के लिए एक नए रणनीतिक व्यापार खाके की आवश्यकता है।’’
इसमें कहा गया, प्रतिस्पर्धी बने रहने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी भागीदारी बढ़ाने के लिए भारत को व्यापार लागत में कमी जारी रखनी होगी तथा निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए सुविधा में सुधार करना होगा।
आर्थिक समीक्षा में कहा गया, ‘‘ अच्छी बात यह है कि ऐसा करना पूरी तरह से हमारे हाथ में है। उद्योग को अपनी ओर से गुणवत्ता में निवेश जारी रखना चाहिए।’’
इसमें साथ ही कहा गया कि देश का बाह्य क्षेत्र आर्थिक व व्यापार नीति अनिश्चितताओं के कारण वैश्विक चुनौतियों के बीच भी जुझारूपन क्षमता रहा है।
समीक्षा में वैश्विक स्थिति का आकलन करने तथा उभरते वैश्विक व्यापार परिस्थितियों से निपटने के लिए एक दूरदर्शी रणनीतिक व्यापार रूपरेखा विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
इसमें कहा गया, ‘‘ अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने तथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में और अधिक एकीकृत करने के लिए, देश व्यापार से संबंधित लागत को कम करने और निर्यात सुविधा को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर सकता है ताकि अधिक जीवंत निर्यात क्षेत्र बनाया जा सके। यह सक्रिय दृष्टिकोण भारत को लगातार बदलते वैश्विक बाजार में आगे बढ़ने में मदद करेगा।’’
अनुमान के अनुसार, 2023 में वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी दो प्रतिशत से अधिक होगी।
चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-दिसंबर अवधि में निर्यात 1.6 प्रतिशत बढ़कर 321.71 अरब डॉलर हो गया तथा आयात 5.15 प्रतिशत बढ़कर 532.48 अरब डॉलर रहा।
अप्रैल-दिसंबर के दौरान व्यापार घाटा (आयात और निर्यात के बीच का अंतर) बढ़कर 210.77 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 189.74 अरब डॉलर था।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में आर्थिक समीक्षा 2024-25 पेश की।
निर्यात बढ़ाने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में समीक्षा में कहा गया, भारत विभिन्न देशों और व्यापारिक निकायों के साथ कई मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) पर बातचीत कर रहा है।
भारत यूरोपीय संघ और ब्रिटेन जैसे बड़े आयातकों के साथ व्यापार सौदों पर बातचीत करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
भारत से सेवा निर्यात ने भी वैश्विक निर्यात में बहु-क्षेत्रीय उपस्थिति दिखाई है। वैश्विक सेवा निर्यात में देश की हिस्सेदारी दोगुनी से अधिक हो गई है। यह 2005 के 1.9 प्रतिशत से बढ़कर 2023 में लगभग 4.3 प्रतिशत हो गई है।
दूरसंचार, कंप्यूटर और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) के वैश्विक निर्यात बाजार में भारत की 10.2 प्रतिशत हिस्सेदारी है जो आईटी ‘आउटसोर्सिंग’, सॉफ्टवेयर विकास और डिजिटल सेवाओं में इसकी मजबूत स्थिति को दर्शाता है। भारत, विश्व में दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है।
भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (फियो) के अध्यक्ष अश्विनी कुमार ने समीक्षा पर टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रक्रियाओं के सरलीकरण, लेन-देन की लागत में कमी तथा नवाचार और प्रौद्योगिकी को अपनाने से निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
भाषा निहारिका अजय
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