नयी दिल्ली, 28 नवंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को आयकर विभाग को पहले से तय हो चुके मामले में अपील दायर करने पर कड़ी फटकार लगाई और कहा कि इस तरह की फिजूल प्रक्रिया से लंबित मामलों का बोझ बढ़ता है।
न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कहा कि ऐसे मामले अदालत में फाइलों की बाढ़ लाते हैं और न्यायिक समय की बर्बादी करते हैं।
पीठ ने कहा, ”हमें समझ नहीं आता कि विभाग इस न्यायालय के पहले के आदेश के बावजूद बार-बार विशेष अनुमति अपील क्यों दायर करता रहता है।”
पीठ के मुताबिक, ”जब उच्चतम न्यायालय ने पहले के किसी फैसले के आधार पर विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी हो, तो उसके बाद विभाग को कोई और याचिका दायर नहीं करनी चाहिए। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि इस तरह के फिजूल मामले दायर करने से अदालत में लंबित मामलों की संख्या बढ़ती है, और न्यायिक समय की अनावश्यक बर्बादी होती है।”
शीर्ष अदालत ने कहा कि आयकर विभाग के पास मुकदमे को लेकर कोई नीति होनी चाहिए। न्यायालय इससे पहले भी आयकर विभाग को अपने ही परिपत्र का पालन न करने पर फटकार लगा चुका है।
भाषा पाण्डेय रमण
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