नयी दिल्ली, 28 अगस्त (भाषा) विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, आधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण बहुत ज़रूरी है और इसके लिए, निर्माण की मंजूरी लेने की प्रक्रिया को आसान बनाना एक अहम कदम है। हालांकि अभी भी अधिकांश राज्यों में यह प्रक्रिया बोझिल और समय लेने वाली है। उद्योग मंडल सीआईआई ने बृहस्पतिवार को यह कहा।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने देशभर में निर्माण परमिट प्रक्रियाओं को सरल और दक्ष बनाने के लिए व्यापक सुधारों की आवश्यकता बतायी है।
उद्योग मंडल के अनुसार, देश ने इस क्षेत्र में सराहनीय प्रगति की है। विश्व बैंक की पिछली कारोबार सुगमता रिपोर्ट में, इस मामले में भारत की रैंकिंग 2017 में 185वें स्थान से बढ़कर 2020 में 27वें स्थान पर पहुंच गई थी। हालांकि, यह सुधार मुख्य रूप से दिल्ली और मुंबई के प्रदर्शन पर आधारित था।
सीआईआई का कहना है कि आज भी, अधिकांश राज्यों में निर्माण की अनुमति लेना एक थकाऊ, जटिल, ऑफलाइन और अपारदर्शी प्रक्रिया बनी हुई है।
उद्योग मंडल के कारोबार सुगमता से जुड़े कार्यबल के चेयरमैन और डीसीएम श्रीराम लि. के चेयरमैन और वरिष्ठ प्रबंध निदेशक अजय श्रीराम ने कहा, ‘‘भारत की बुनियादी ढांचागत महत्वाकांक्षाओं के लिए एक तेज और पारदर्शी प्रणाली की आवश्यकता है, लेकिन अलग-अलग मंजूरियां और देरी की प्रक्रियाएं अभी भी कई राज्यों में उद्योग के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।’’
उन्होंने एक ऐसी व्यवस्था की जरूरत बतायी जो तकनीक पर आधारित, समय-सीमा के साथ, भरोसेमंद और जवाबदेह हो, ताकि परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जा सके और निवेशकों का विश्वास बढ़े।
सीआईआई ने निर्माण मंजूरी की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए कई सुझाव दिए हैं। इन सुझावों में सभी राज्यों में एक प्रभावी ऑनलाइन एकल खिड़की प्रणाली, शुल्क का अनुमान लगाने वाला ऑनलाइन कैलकुलेटर, डिजिटल भुगतान और आवेदन की स्थिति पर नजर रखने के लिए एक डैशबोर्ड आदि शामिल हैं।
सीआईआई ने यह भी सुझाव दिया कि एक ही बार में संयुक्त निरीक्षण का प्रावधान होना चाहिए, जिसमें सभी संबंधित एजेंसियां एक साथ मिलकर जांच करें। इससे अनावश्यक देरी से बचा जा सकेगा।
श्रीराम ने कहा, ‘‘इन सुधारों को अपनाने से भारत के बुनियादी ढांचे के विकास में गति आएगी, बाधाएं कम होंगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और कुल मिलाकर आर्थिक वृद्धि तेज होगी…।’’
भाषा योगेश रमण
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