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Friday, 3 April, 2026
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मांग में कमजोरी, महंगाई बढ़ने से फरवरी में सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर धीमी: सर्वेक्षण

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नयी दिल्ली, चार मार्च (भाषा) घरेलू मांग में सुधार की गति धीमी पड़ने और मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी के कारण फरवरी माह में भारत के सेवा क्षेत्र की विकास दर में आंशिक गिरावट दर्ज की गई है। बुधवार को जारी एक मासिक सर्वेक्षण के अनुसार, प्रतिस्पर्धा में वृद्धि के चलते नए क्रय आदेशों की वृद्धि दर 13 माह के निचले स्तर पर आ गई है।

सावधिक प्रभावों हेतु समायोजित ‘एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई व्यवसाय गतिविधि सूचकांक’ जनवरी के 58.5 से घटकर फरवरी में 58.1 रह गया।

क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) की कार्यप्रणाली के अनुसार, 50 से अधिक का अंक क्षेत्र के विस्तार को दर्शाता है, जबकि 50 से कम का अंक संकुचन का परिचायक होता है।

एचएसबीसी की मुख्य भारतीय अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा, ‘भारत का सेवा पीएमआई फरवरी में 58.1 रहा, जो जनवरी के 58.5 के लगभग समान है। यह इस क्षेत्र में निरंतर सुदृढ़ विस्तार का संकेत है। यद्यपि बढ़ती प्रतिस्पर्धा के मध्य नए आदेशों की वृद्धि दर 13 माह के न्यूनतम स्तर पर रही, किंतु सेवा प्रदाताओं ने अंतरराष्ट्रीय विक्रय में उल्लेखनीय प्रगति देखी और परिचालन आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु नियुक्तियों में तीव्रता प्रदर्शित की।’

सर्वेक्षण के विवरण के अनुसार, ग्राहकों की बढ़ती पूछताछ और विपणन प्रयासों ने कुछ इकाइयों की बिक्री को संबल प्रदान किया, जबकि कुछ कंपनियों ने अत्यधिक प्रतिस्पर्धी वातावरण के कारण विकास की गति बाधित होने की बात कही।

निर्यात के मोर्चे पर प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा। सेवा प्रदाता कंपनियों ने कनाडा, जर्मनी, चीन, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ब्रिटेन और अमेरिका सहित विश्व के कई क्षेत्रों से लाभ होने की सूचना दी। औसतन, अंतरराष्ट्रीय बिक्री पिछले अगस्त के पश्चात तीव्रतम गति से बढ़ी है।

मूल्य के मोर्चे पर, फरवरी के आंकड़े भारतीय सेवा क्षेत्र की कंपनियों के परिचालन व्यय में पिछले ढाई वर्षों की सर्वाधिक तीव्र वृद्धि को दर्शाते हैं। इसके परिणामस्वरूप, सेवाओं के प्रावधान हेतु ली जाने वाली कीमतों में पिछले छह महीनों की सबसे बड़ी वृद्धि की गई।

भंडारी ने स्पष्ट किया, ‘लागत और उत्पाद दोनों स्तरों पर मुद्रास्फीति में वृद्धि हुई है। कंपनियों ने खाद्य और श्रम पर होने वाले अतिरिक्त व्यय का भार ग्राहकों पर हस्तांतरित किया है। इसके बावजूद, व्यावसायिक आत्मविश्वास एक वर्ष के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है क्योंकि कंपनियां बाजार में अपनी उपस्थिति को व्यापक बनाने की इच्छुक हैं।’

इस मध्य, विनिर्माण क्षेत्र में सुदृढ़ स्थिति के कारण फरवरी के दौरान भारत की समग्र व्यावसायिक गतिविधि तीन माह में सर्वाधिक तीव्र गति से बढ़ी।

‘एचएसबीसी इंडिया कंपोजिट पीएमआई आउटपुट इंडेक्स’ जनवरी के 58.4 से बढ़कर फरवरी में 58.9 हो गया।

भाषा सुमित पाण्डेय

पाण्डेय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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