नयी दिल्ली, 17 नवंबर (भाषा) पूंजी बाजार नियामक सेबी ने म्यूचुअल फंड यूनिटधारकों के लाभांश और यूनिट बेचने से प्राप्त राशि के अंतरण के मामले में संपत्ति प्रबंधन कंपनियों (एएमसी) के लिये नये नियमों को अधिसूचित किया है।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने बृहस्पतिवार को एक अधिसूचना में कहा कि नये नियम के तहत प्रत्येक म्यूचुअल फंड और संपत्ति प्रबंधन कंपनी को यूनिटधारकों को लाभांश भुगतान तथा यूनिट भुनाने या पुनर्खरीद राशि सेबी की तरफ से तय अवधि के भीतर अंतरण करने की जरूरत होगी।
अगर भुनायी गयी राशि निर्धारित अवधि में अंतरण नहीं की जाती है, संबंधित संपत्ति प्रबंधन कंपनी (एएमसी) को विलंब के अनुसार ब्याज भुगतान करना होगा।
सेबी ने कहा, ‘‘यूनिटधारकों को लाभांश या यूनिट बेचेने से प्राप्त राशि के अंतरण में देरी के एवज में ब्याज भुगतान के बावजूद एएमसी के खिलाफ इस देरी के लिये कार्रवाई की जा सकती है।’’
इसने आगे कहा कि पुनर्खरीद (म्यूचुअल फंड को यूनिट की बिक्री) या लाभांश भुगतान भौतिक रूप केवल असाधारण परिस्थितियों में भेजा जाएगा और एएमसी को भौतिक रूप से भेजे जाने वाले ऐसे सभी मामलों के कारणों के साथ रिकॉर्ड बनाए रखने की आवश्यकता होगी।
सेबी ने इसके लिये म्यूचुअल फंड नियमों में संशोधन किया है। नये मानदंड 15 जनवरी से लागू होंगे।
भाषा
रमण अजय
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