नयी दिल्ली, 30 अक्टूबर (भाषा) बाजार नियामक सेबी ने निवेश सलाहकारों (आईए) को बड़ी राहत देते हुए अब उन्हें ग्राहकों की पहले से किसी अन्य वितरक के प्रबंधन में चल रही परिसंपत्तियों पर ‘सेकंड ओपिनियन’ यानी दूसरी राय देने की मंजूरी दे दी है।
पहले निवेश सलाहकार इस तरह की निवेश परिसंपत्तियों पर मशविरा तो दे सकते थे, लेकिन इसके लिए वे कोई शुल्क नहीं ले सकते थे। लेकिन अब सेबी ने उन्हें 2.5 प्रतिशत वार्षिक शुल्क लेने की भी अनुमति दे दी है।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने तत्काल प्रभाव से लागू एक परिपत्र में कहा, “निवेशकों को पहले से किसी अन्य वितरक के प्रबंधन वाली अपनी परिसंपत्तियों पर दूसरी राय देकर निवेश सलाहकार प्रति वर्ष संपत्ति मूल्य का अधिकतम 2.5 प्रतिशत शुल्क ले सकते हैं।”
हालांकि, निवेश सलाहकारों को इसका स्पष्ट रूप से खुलासा करना होगा और हर वर्ष ग्राहक से लिखित सहमति लेनी होगी कि सलाह शुल्क के अतिरिक्त उन्हें संबंधित वितरक को भी शुल्क देना होगा।
पहले के नियमों के तहत यदि किसी ग्राहक की परिसंपत्तियां किसी अन्य वितरक के अधीन थीं, तो उन्हें सलाह शुल्क की गणना से बाहर रखा जाता था। इससे निवेश सलाहकार उन परिसंपत्तियों पर राय देने से बचते थे।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
अजय
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.