मुंबई, 30 सितंबर (भाषा) वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं के बीच विदेशी पूंजी की सतत निकासी के दबाव में रुपया मंगलवार को चार पैसे टूटकर 88.79 (अस्थायी) प्रति डॉलर के अबतक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने हालांकि कहा कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट और डॉलर के कमजोर रुख से स्थानीय मुद्रा में भारी गिरावट टल गई।
उन्होंने साथ ही बताया कि निवेशक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति के फैसले से पहले सतर्क हैं जिसकी घोषणा बुधवार को की जाएगी।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया, डॉलर के मुकाबले 88.73 पर खुला। कारोबार के दौरान 88.69 से 88.80 प्रति डॉलर के दायरे में कारोबार करने के बाद अंत में 88.79 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ जो पिछले बंद भाव के मुकाबले चार पैसे की गिरावट है।
रुपया सोमवार को एक सीमित दायरे में स्थिर रहा और तीन पैसे की गिरावट के साथ 88.75 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने कहा, ‘‘ विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के डॉलर खरीदने के लगातार दबाव के कारण रुपया कमजोर हुआ है…। अगस्त से अमेरिकी शुल्क लागू होने के बाद से व्यापार में आई गिरावट के कारण एफपीआई की बिकवाली के कारण रुपया कमजोर बना हुआ है।’’
उन्होंने कहा कि बुधवार को इसके 88.50 से 89.00 प्रति डॉलर के बीच रहने का अनुमान है।
इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.11 प्रतिशत की गिरावट के साथ 97.79 पर आ गया।
घरेलू शेयर बाजारों में सेंसेक्स 97.32 अंक फिसलकर 80,267.62 अंक पर जबकि निफ्टी 23.80 अंक की गिरावट के साथ 24,611.10 अंक पर बंद हुआ।
अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 1.03 प्रतिशत की गिरावट के साथ 67.27 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर रहा।
शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) सोमवार को बिकवाल रहे थे और उन्होंने शुद्ध रूप से 2,831.59 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
भाषा निहारिका रमण
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